ई-पेपर
Change Your City
 

Go to Page << Previous1234567...1718Next >>

 
 
 
दुनिया में सबसे ज्यादा रेस्त्रां मॅकडोनाॅल्ड्स के नहीं सबवे के हैं।  प्रधानमंत्री का है प्रपोजल   प्रधानमंत्रीने फीमेल कंटींजंट बनाने का प्रपोजल दिया है। इतनी महिला अफसर फ्री करना हालांकि मुश्किल है, मगर सेना की ज्वाइंट कंटींजंट या ट्रेनिंग कर रही महिला अफसरों को तैयार करने का प्रयास हो रहा है।   -मनीष ओझा, रक्षाप्रवक्ता  ट्रेन में छेड़छाड़, युवती ने किया शिकायती ट्वीट और रुकी ट्रेन  हम सब मलाला : पेशावर हमले के 3 दिन बाद स्कूल पहुंचे बच्चे  {संतोष ठाकुर . नईदिल्ली   सरकारका40 हजार पेट्रोल पंप खोलने का लक्ष्य है। मोदी सरकार ने इनके आवंटन में पहली बार पिछड़े वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की है। 18 हजार नये पंप के लिए विज्ञापन जारी हुए हैं या ये प्रक्रिया में है। इसकी आवेदन की प्रकिया शुरू कर दी गई है। जबकि पेट्रोल पंप डीलर्स का मानना है कि अब ये फायदे का सौदा नहीं रहे हैं। नये पंप के लिए पेट्रोलियम कंपनियों ने अब गारंटी मनी की शर्त भी लगा दी है। जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि यह स्कीम सफल होगी। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक पिछले वर्षोंं की तुलना में आवेदन की रफ्तार सुस्त हुई है। अभी प्रक्रिया चालू है, अंतिम समय पर आवेदन की संख्या बढ़ भी सकती है।   तीनों सरकारी ऑयल कंपनियों में पिछले सात-आठ साल के अंदर कोई सौ या सवा सौ पंप सरेंडर करने के मामले होंगे। उक्त बात सरकारी पेट्रोलियम कंपनी के अधिकारी ने बताई। उनके मुताबिक अगर सरेंडर की बात करें तो इनमें से भी कुछ मामलों में लोगों ने व्यक्तिगत कारणों से इन्हें सरेंडर किया है। मसलन, किसी का बेटा आईटी इंजीनियर बन गया है। उसकी विदेश में कहीं नौकरी लग गई है। आवंटी अकेला पंप नहीं चला सकता है और वह पंप को किसी रिश्तेदार या कर्मचारी के भरोसे नहीं चलाना चाहता है तो उसने पंप लौटाने का निश्चय कर लिया।   ऑल इंडिया पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल कहते हैं कि पेट्रोल पंप अब लाभ का काम नहीं है। पेट्रोल पर करीब 2 रुपए और डीजल पर 1 रुपए कमीशन मिलता है। खर्च के मुकाबले यह कमीशन कम है। तेजी से पंप खुलने से बिक्री का ग्राफ घटा है। पिछले तीन-चार साल में बिक्री औसतन एक महीने में एक पंप से 2 लाख लीटर से घटकर एक लाख लीटर पर गयी है। ऐसे में सरकार को कमीशन पर फिर से विचार करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर खर्च तेजी से बढ़े हैं। सर्वाधिक 50 फीसदी तक खर्च वेतन का ही है। एक शिफ्ट में पांच से सात लोग चाहिए। एक व्यक्ति की औसत वेतन 10 हजार रुपये के हिसाब पांच व्यक्ति का वेतन 50 हजार रुपये होता है। दो शिफ्ट में यह एक लाख रुपये होता है। बिजली खर्च 10-15 फीसदी, पांच फीसदी खर्च तो सिर्फ पेट्रोल-डीजल के उड़ने से ही होता है। वहीं अन्य खर्च 20 फीसदी होता है। ऐसे में फायदे की स्थिति मुश्किल से ही बन पाती है। àæðáÂðÁ%8 ÂÚ     पेट्रोलियमकंपनी के अधिकारी के मुताबिक गारंटी मनी बाजार की असली ताकत सामने लाएगा। अगर कहीं पर पेट्रोल पंप की डिमांड है तो सरकारी तेल कंपनी को उसका लाभ मिलना चाहिए। इसी कारण गारंटी मनी का निर्णय लिया गया है। आवेदक को एप्लीकेशन के साथ डेढ़ लाख रुपए जमा कराना होगा। उसके बाद बोली होगी। सफल आवेदक को बोली के पैसे देने होंगे। अगर वह पैसा देने में विफल रहता है तो दूसरे स्थान पर रहे व्यक्ति या सभी आवेदकों से फिर बोली लगाकर पंप का अलॉटमेंट किया जाएगा। आवेदक से पैसे लेने पर सरकारी तेल कंपनियों को पंप का ढांचा बनाने, टैंक बनाने आदि पर खर्च नहीं करना होगा। इस तरह कंपनियां अपफ्रंट खर्च से बचेंगी।  ड्राइविंग लाइसेंस देने का नहीं है प्रावधान  भारत का सबसे बड़ा समाचार पत्र समूह
 
 
 
 
MATRIMONY
 
विज्ञापन