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मधुरेश|पटना   यह बिहार चुनाव न सिर्फ चुनाव आयोग बल्कि राजनीतिक दलों के लिए भी मदर ऑफ ऑल इलेक्शन्स है। फिलहाल सभी दल अंकों और गठबंधन के खेल में उलझे हैं।   पिछले साल के लोकसभा चुनाव में एनडीए के घटक दलों-भाजपा, लोजपा, रालोसपा ने लोकसभा की 40 में से 31 सीटें जीती। यह भी तब हुआ, जब एनडीए गठबंधन को अपने विरोधियों से 3.42 प्रतिशत वोट कम मिले थे। लेकिन विधानसभा चुनाव एनडीए के लिए बड़ा मुश्किल है। क्योंकि लोकसभा चुनाव में एनडीए विरोधी वोट बंटा हुआ था। लोकसभा चुनाव में िमले एनडीए विरोधी वोटों को मिला दिया जाए तो भाजपा और सहयोगी दल सिर्फ 98 क्षेत्रों में जीत की स्थिति में हैं। एनडीए विरोधी खेमा 145 सीटों पर आगे दिख रहा है। राज्य में विधानसभा की कुल 243 सीटें है। ऐसे में एनडीए विरोधियों का पलड़ा भारी दिखता है।  गांव वालों ने खोला मॉल, जहां हर चीज एमआरपी से सस्ती   एचआईवी पाॅजीटिव से शादी को हुए सफल 4 वर्ष, ली बेटी गोद   इस वर्ष हम खरीदेंगे दस करोड़ स्मार्टफोन   एक हिट, बाकी पाकिस्तानी एक्टर्स कतार में   540 किलोमीटर लंबी नहर और पाइपलाइन रेगिस्तान से होते हुए अमेरिका के फिनिक्स शहर में पहुंचाएगी पानी   2033 तक 1215 प्राइवेट जेट खरीदेंगे भारतीय रईस   घर बैठे जोड़ सकेंगे नई मतदाता सूची में नाम   24 मई 2015, ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष 6-7, 2072   बिहार चुनाव: लालू और नीतिश साथ, मांझी पर सबकी निगाहें
 
 
 
 
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