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    रसोई | थाली में इडली, देसी खाना नहीं मिलता   परदेसी दुल्हनें अब रसोई में सांभर, चोखा, चावल भी पकाने लगी हैं। पति और सास-ससुर भी बहू के अनुसार ही खाना खा रहे हैं। क्योंकि बहु को देसी खाना बनाना नहीं आता। मोखरी गांव के 70 वर्षीय प्रेमसिंह बताते हैं कि उनकी दो बहुएं दूसरे प्रदेश से हैं। सर्दी में हम बाजरे की खिचड़ी, रोटी खाते थे, लेकिन अब चावल ज्यादा बनने लगा है। सांबर और दाल के साथ, यह हमने पहले कभी नहीं खाया।  हरियाणा : नहीं बचाईं बेटियां   नशे के खिलाफ तीन करोड़ लोगों ने बनाई 11400 किमी लंबी मानव श्रृंखला   गांव में किसी की लम्बाई 3.5 फीट से ज्यादा नहीं   बेटियां न बचा पाने के दुष्परिणाम अब साफ दिखने लगे हैं, राज्य अपनी पहचान खो रहा है   ढाई लाख बहुएं बाहर से, 46% अब भी कुंवारे   70 छोटे कद वालों के लिए है विशेष जगह   कल नो निगेटिव न्यूज के साथ करें   नए सप्ताह की पॉजिटिव शुरुआत