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मेरी प्रेरणा सकारात्मकता, कविताओं ने हौसला बढ़ाया   हमारी सोच ही हमारे दुख या सुख का कारण होती है। बचपन में दूसरों को खेलता देख मैं भी खेलना चाहता था। बारिश में सुहाने मौसम में घूमना चाहता था। हर वक्त पिताजी साथ नहीं होते, तो घूमना संभव नहीं था। एक दिन दुखी होकर घर में बैठा था, तभी अपने आप यह गीत सूझा कोई तो सांकल खटकाए, बंद खिड़कियों जैसा मन मेरा। मेरा मानना है कि कविताएं सुकून और ताकत देती हैं। दादाजी दत्तात्रेय वाघमारे और पिता प्रभंजन दत्त दोनों को लिखने का शौक है। घर में छोटे भाई- बहन साथ रहते हैं। खेलकूद में रुचि थी, लेकिन यह मेरे लिए असंभव था। इसलिए शुरू से ही कई किताबें पढ़ीं। सेकंड फ्लोर पर रोज सीढ़ियां चढ़ते हुए मेरे पांव में कुछ मजबूती आई है। अब कम से कम मदद के लिए बाहर आ-जा सकता हूं।  प्रेमचंद की कहानियों का मंचन 28-29 को   नाट्य कार्यशाला में युवा रंगकर्मियों को मिले टिप्स   ग्लैमर    सलमान खान की अगली फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी नहीं कर रहे हैं। क्रिसमस ...  हठयोग कार्यक्रम 27 से 31 जुलाई तक   चीन सहित 5 देशों के YouTube चैनल पर हिट जुबेर की कंपोजीशन   नीट-2 में केमेस्ट्री का पेपर कठिन, फिजिक्स आसान   अलग बिरादरी में प्यार क्या गुनाह है
 
 
 
 
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