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- 2008 में कहा था-यूं तिल-तिल कर मरने से अच्छा है मौत दे दो, लेकिन ये सरकार फांसी भी नहीं दे ञ्चप्रणब ने दया याचिका की फाइलें निपटाने में तेजी दिखाई। कसाब की फाइल 1 महीने जबकि अफजल की फाइल उन्होंने १२ दिन में निपट
- इसके हर पहलू में राजनीति इसलिए ढेर सारे अर्थ
कड़े फैसले के 4 बड़े किरदार
चाहता था-आडवाणी प्रधानमंत्री बनें
ञ्चकल्पेश याग्निक
प्र. अचानक यह क्या हुआ?
- ञ्चकसाब की ही तरह अति गोपनीय तरीके से दी फांसी ञ्चअफजल की मौत का एक-एक पल वीडियो में
भास्कर न्यूजन नेटवर्कत्ननई दिल्ली
आखिरकार अफजल गुरु को फांसी पर लटका दिया गया। ठीक उसी तरह जैसे 80 दिन पहले कसाब - असर
