Change Your City
 

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प्रतापसिंह सनकतत्नअजमेर     सचिन पायलट महज २६ वर्ष की उम्र में दौसा से सांसद चुने गए थे। पिता राजेश पायलट की छवि का फायदा मिला था तब। अब ३६ वर्ष की उम्र में वे न सिर्फ कंपनी मामलों के कैबिनेट मंत्री हैं, बल्कि राहुल गांधी के करीबी भी। यही कारण है कि अजमेर सीट पर भाजपा उनके पीछे पड़ गई है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे यहां तीन बड़ी सभाएं कर चुकी हैं। कांग्रेस के वोट बैंक को छिन्न-भिन्न करने के लिए भाजपा ने जाट नेता और राज्य सरकार के मंत्री सांवरलाल का मैदान में उतारा है।   परिस्थिति को समझते हुए पायलट पूरी तरह से अपनी ही सीट तक सिमट कर रह गए हैं। वरना पिछले चुनाव में उन्होंने राज्य की अन्य सीटों पर भी गुर्जर वोटों को कांग्रेस के पक्ष में लाने के लिए प्रचार किया था। भाजपा ने पायलट के धुरविरोधी जाट नेता अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी को अपने समर्थन में ला खड़ा किया है। इसके अलावा पूर्व विधायक और दलित नेता बाबूलाल सिंघाडिय़ा को भी भाजपा की सदस्यता दिलवा दी है। पायलट ने भी पलटवार करते हुए राजपूत नेता भूपेंद्र सिंह शक्तावत को कांग्रेस में शामिल करवाया। ये कोशिशें क्या रंग लाएंगी, ये तो भविष्य बताएगा, लेकिन अंतिम समय तक भाजपा मोदी के नाम पर और पायलट अपने कामों का वास्ता देते हुए वोट मांगते रहे।  यूपीए  चुनावी महायज्ञ की सबसे बड़ी आहूति   १२ राज्यों   की   १२१ सीटों   पर वोटिंग आज
 
 
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