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‘शहर से15 किलोमीटर की दूरी पर एक ऐतिहासिक स्थल है चप्पड़ चिड़ी। यह जगह पहले छप्पड़ां वाली झिड़ी के नाम से जानी जाती थी। वजह, इस इलाके में बहुत सारे साफ पानी के छप्पड़ हुआ करते थे, जो धीरे-धीरे खत्म हो गए। यही वो जगह है जहां 12 मई 1710 को बाबा बंदा सिंह बहादुर ने वजीर खान को मार गिराया था। 21 एकड़ में फैला वो जंग का मैदान आज भी यहां है। शहादत को नमन करता आैर सिखों की मुगलों पर जीत की याद दिलवाता फतेह बुर्ज भी यहीं पर। इसे 2011 में बनवाया गया था। खैर, हो सकता है इस सबसे आप वाकिफ हों, पर शायद आपके बच्चों को यह मालूम हो। यही वजह थी कि मैं अपनी फैमिली के साथ ही यहां जाना चाहती थी, ताकि मेरा बेटा सिख इतिहास से वाकिफ हो सके आैर यह भी जान सके कि इस जगह का क्या महत्व है। जब हम पहुंचे तो सबसे पहले फतेह बुर्ज दिखाई दिया। वह काफी ऊंचा है, कुतुब मीनार से भी 100 फुट ऊंचा। इसके बाद हम पहुंचे मेमोरियल हॉल में जहां पर संग्रहालय बना है। लाइट एंड साउंड ऑडिटोरियम भी हमें बहुत अच्छा लगा, आप जाएं तो इसे जरूर देखें। वहां आपको सिख योद्धाओं की झलकियां देखने को मिलेंगी। यहां पर एक छोटी सी झील भी है आैर एक कैफेटेरिया भी बना हुआ है।
 
 
 
 
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