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चंडीगढ़ कोवैल प्लान्ड सिटी कहा जाता आया है, लेकिन वक्त के साथ-साथ बढ़ी आबादी से अब यह शहर पहले जैसा प्लान्ड नहीं रहा। सबसे पहली समस्या छत की है। मुझे खुशी है कि मेरे शहर में पाइप लगाकर कारों को धोने पर पाबंदी है, इससे पानी की बर्बादी नहीं होती। फिर भी पानी की कमी रहती है। पहले जहां 24 घंटे पानी आता था, वहीं अब कुछ घंटों के लिए ही पानी आता है। अर्बन और स्लम दोनों ही एरिया में सरकार को पानी से संबंधित सरकार को आैर कड़े नियम लागू करने होंगे। ट्रैफिक की समस्या भी शहर में आम हो गई है। इसके लिए ट्रैफिक लाइट्स को गाड़ियों की संख्या के आधार पर नियंत्रित करने की जरूरत है। बसों की सेवा को आैर बेहतर बनाना चाहिए। इस वक्त शहर में सिर्फ 100 लो फ्लोर बसें हैं, मैं चाहता हूं कि इनकी संख्या 400 तक पहुंचे। शहर में कई स्कूल एेसे हैं जहां आज भी कंप्यूटर औपचारिकता भर है। आने वाला समय पूरी तरह तकनीक पर आधारित होगा, ऐसे में हम अपने स्कूलों में कंप्यूटरीकरण से पीछे नहीं हट सकते। हमारे पास लैक्चर को रिकॉर्ड करने की सुविधा भी नहीं है। विदेशों की तर्ज पर अब हमारे स्कूलों में वर्चुअल क्लासरूम भी नहीं हैं। ऑनलाइन एडमिशन भी बहुत कम होता है। क्या कोई ऐसा माध्यम है जिससे हम अपने युवा टैलेंट को शहर में ही रख सकें। मैं अपने शहर को इन सुविधाओं से भरपूर देखना चाहता हूं। क्या कोई ऐसा माध्यम है जिससे हम अपने शहर के युवा टैलेंट को शहर में ही रख सकें। ऐसा अकसर होता है, युवा बाहर पढ़ाई करने के लिए नौकरी के सिलसिले में जाते हैं। मुझे उम्मीद है कि हम जल्द ही अपने शहर को इन सुविधाओं से भरपूर देखेंगे जो हमारी जरूरत भी है। बस यही मेरी ख्वाहिश भी है, यह शहर आगे बढ़े आैर हम भी इसके साथ-साथ आगे बढ़ें।
 
 
 
 
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