तंबाकू से बिहार में हर साल एक लाख से अधिक मौतें

तंबाकू से बिहार में हर साल एक लाख से अधिक मौतें

तीन कैंसर रोगी, तीन कहानी और संदेश एक; तंबाकू छोड़ो, जिंदगी से नाता जोड़ो

खुद तो भुगते, मगर आने वाली पीढ़ी को बचाएंगे

पीड़ितों ने कहा- तंबाकू से यारी ने जीवन को बर्बादी के कगार पर ला दिया

कार्यशाला

पटना|तंबाकू सेदेश बिहार में हर वर्ष करीब 1.25 लाख मौतें हो रही हैं। वाॅयस ऑफ टोबेको विक्टिम्स के संजय सेठ ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार में 54 फीसदी लोग तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। 440 से अधिक बच्चे हर रोज किसी किसी रूप में तंबाकू का सेवन शुरू कर रहे हैं। जबकि तंबाकू छोड़ने की संभावना सिर्फ 5 फीसदी है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि बिहार में 3.6 करोड़ युवा इससे प्रभावित हैं। करीब 60 फीसदी तंबाकू प्रयोग करने वाले गरीब तबकों से आते हैं। उम्र की बात करें तो ज्यादातर शुरुआत 8-10 वर्ष में बिहार में कर रहे हैं। आशिमा सरीन राजेंद्र कुमार ने बताया कि प्रदेश में 53.5 प्रतिशत लोग किसी किसी रूप में तंबाकू अन्य धूम्रपान उत्पादों का सेवन करते हैं। इनमें सिगरेट 5.9 प्रतिशत, बीड़ी 8.4 प्रतिशत शामिल है।

सिटी रिपोर्टर|पटना

बचपनमें दोस्तों संग खैनी खाने, सिगरेट पीने की लत लगी। पहले यूं ही मजाक-मजाक में खाया, फिर धीरे-धीरे ऐसी लत लगी कि दोस्त धीरे-धीरे दूर हो गए और इनसे ही यारी हो गई। स्कूल के दिनों में लगी इस लत से कॉलेज में याराना और गहरा हो गया। बचपन और फिर जवानी की दहलीज पर सिगरेट, तंबाकू से यारी ने जीवन को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ी कर दी है। बिहार के इन कैंसर मरीजों ने ठान लिया है कि खुद को तो नहीं बचा पाए लेकिन बिहार की युवा आबादी को नहीं बर्बाद होने देंगे। तंबाकू को खत्म करने के लिए अब ये लड़ाई लड़ रहे हैं। लोगों को प्रेरणा दे रहे हैं। अपनी कहानियों के जरिए उन्हें अपने हालात से रूबरू करा रहे हैं। इन कैंसर पीड़ितों की तंबाकू के लत लगने और परिवार के बिखराव की अपनी-अपनी अलग कहानी है। पर, संदेश एक है- अपनी जिंदगी से तंबाकू को डिलीट कर दीजिए। होटल चाणक्या में वाॅयस ऑफ टोबेको विक्टिम्स डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आए इन मरीजों की कहानी उन्हीं की जुबानी।
गुल नेजिंदगी की बत्ती गुल की
गर्दनीबागके हरिशंकर ओझा कहते हैं- बचपन में दोस्तों ने कहा था कि गुल से शौच अच्छा होता है। तभी गुल खाना शुरू किया और उसने जिंदगी की बत्ती गुल कर दी। कभी नहीं सोचा था कि उन्हें कैंसर हो सकता है। हमेशा तंबाकू को एंज्वाय किया। गुल के साथ पान और अन्य तंबाकू का भी खूब सेवन किया। कहा- आज अपनी सोच पर पछतावा होता है। बस अब यही है कि युवा पीढ़ी को इससे दूर रख सकूं।
पान नेछीन ली गायक की आवाज
सब्जपुरा,दुल्हिनबाजार के 40 वर्षीय पुजारी ब्रजेश कुमार मिश्र अपने गांव के अच्छे गायकों में थे। गजल लिखते और सुनाते। आसपास के कई गांवों में उन्हें बुलाया जाता। पान ने उनसे उनकी आवाज ही छीन ली। टंग कैंसर हुआ और अब बोलने में दिक्कत होती है। बेटा बीटेक कर रहा है, उसकी फीस नहीं जमा हो पा रही। पत्नी प्राइवेट टीचर हैं। अब ये बिहार के युवाओं को तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
सड़क परगया परिवार
सुनीलसिंह ने बताया कि कॉलेज के दिनों में पहली बार दोस्तों संग मजाक में खैनी खाई थी। धीरे-धीरे आदत पड़ गई। आज 40 साल के हैं। दो साल पहले अचानक पता चला कि माउथ कैंसर हो गया है। परिवार सड़क पर गया। स्टेशनरी की छोटी-सी दुकान थी। दवा कराते-कराते वह भी बंद हो गई। रिश्तेदारों ने मुंह मोड़ लिए। पत्नी का जेवर तक बेचना पड़ा।