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राजीव सिन्हा 9835236367   धनबादनगर निगम के हर काम में जम कर लूट हुई। नतीजा नगर नरक बन गया और निगम गबन का पर्याय। निगम में अजीबो-गरीब कारनामों की फेहरिस्त में एक और नया अध्याय जुड़ गया है। वार्ड संख्या 20 के पोलिटेक्निक रोड स्थित हरिजन टोला में योजना संख्या 222/एफ 2/2014-15 के तहत हरिजन कालोनी, न्यू चन्द्र शेखर आजाद नगर के पास सामुदायिक भवन का निर्माण होना तय हुआ। योजना की स्वीकृति मिलने के बाद मेसर्स मंगल कंस्ट्रक्शन नामक एजेंसी को निर्माण कार्य पूरा करने की जिम्मेवारी सौंपी गई। इसके लिए इकरारनामा राशि के रूप में 3 लाख 77 हजार 881 रुपए तय हुआ। निर्माण स्थल पर विभाग ने पूरे विवरण के साथ बोर्ड लगा दिया। बोर्ड पर मेयर श्रीमती इंदु सिंह, डिप्टी मेयर नीरज सिंह, कार्यपालक अभियंता इंद्रेश शुक्ला और तात्कालीन नगर आयुक्त एसएस चौधरी का नाम अंकित है।  मेरी 4-5 वर्षीया बेटी का नामांकन डिगवाडीह के एक मिशनरी स्कूल में उसकी मेरिट पर हुई। एक-दो सप्ताह तक बेटी काफी खुश होकर स्कूल गई। परन्तु कुछ सप्ताह बाद स्कूल जाने के नाम पर रोना शुरू करने लगी। वह घर पर पढ़ाई करने की बात कह कर स्कूल जाने से मना करने लगी। उस वक्त मैं समझ नहीं पाई कि माजरा क्या है। मैंने स्कूल जाकर क्लास टीचर से बेटी के स्कूल नहीं जाने की जिद पर चर्चा की। इसके बाद दो-तीन सप्ताह तक स्कूल गई और सब कुछ ठीक-ठाक रहा। इस दौरान मैंने बेटी के क्लास वर्क के बारे में जानना चाहा तो बेटी ने क्लास टीचर की क्रूरता की जानकारी दी और बताया कि टीचर का व्यवहार बच्चों के प्रति अच्छा नहींं है। उसी दौरान एक रात आधी रात को बेटी जाग गई और चिल्ला कर रोने लगी। मैंने चुप कराने के लिए सख्ती दिखाई तो वह कमरे के एक कोने में अपनी कान पकड़कर खड़ी हो गई और हिचकी के साथ रोते हुए कहने लगी कि ....मम्मी, मैं दुबारा ऐसा नहीं करूंगी...मुझे छोड़ दो..। मैं आश्चर्यचकित होकर उसे देखने लगी कि वह ऐसा क्यों कर रही है। मुझे लगा कि स्कूल में उसके साथ होने वाले कृत्यों के कारण घर पर भी वह सजा के तौर पर ऐसा करने को विवश हुई है। दूसरे दिन मैं स्कूल गई तो टीचर ने मुझे देखते ही चिल्ला कर कहा कि फिर आप गईं, अपनी बच्ची को घर ले जाइए वो नहीं पढ़ सकती। मैं अपमानित होकर चुपचाप टीचर की डांट सुनती रही। इस घटना के कुछ दिनों बाद मैंने अपनी बेटी को एक होम्योपैथ डाक्टर के पास ले जाकर बेटी के गुमसुम रहने की बातों से अवगत कराया। डाक्टर ने इस संबंध में प्रिंसीपल से बात करने को कहा। मैंने स्कूल के वाइस प्रिंसीपल से बात की और बताया कि मेरी बेटी क्लास टीचर की क्रूरता से मानसिक तौर पर अस्वस्थ होती जा रही है। इस पर वाइस प्रिंसीपल ने कहा कि उनकी टीचर बहुत अच्छी है और उनके खिलाफ कुछ भी कहना गलत होगा। इस दौरान मेरी बेटी का स्वास्थ्य बहुत ही खराब हो गया, परन्तु पढ़ाई के लिए चिंतित रहने के वजह से मैं बेटी के हेल्थ की ओर से अंजान बनी रही। संयोगवश उक्त क्लास टीचर छह माह के लिए छुट्टी पर चली गई। दूसरी क्लास टीचर गई और मेरी बेटी के व्यवहार में आश्चर्यजनक तरीके से परिवर्तन गया। अब वह खुश दिखने लगी और स्कूल जाने में भी किसी प्रकार का कोई हील-हुज्जत नहीं। सब कुछ काफी अच्छा हो गया था। एक दिन वह बोली कि मम्मी गंदी टीचर चली गई और अच्छी टीचर गई है, वह बहुत प्यार करती है। यह सब एक महीने में हो गया। छह माह गुजर गए, पुरानी टीचर फिर गई। कुछ दिनों बाद मेरी बेटी फिर वही पुराने ढर्रे पर लौट आई और स्कूल जाने से बचने की कोशिश करने लगी। इस बार मैं फिर से वाइस प्रिंसिपल से मिली और छह माह की सारी घटनाओं को बताया। इस बार वाइस प्रिंसिपल ने काफी अभद्र तरीके से मुझे अपने चेंबर से बाहर निकलने को कहा और बेइज्जत किया। मेरा संयम जवाब दे दिया और मैं वहीं बैठकर रोने लगी। दो-तीन घंटे बाद मैं नार्मल हुई तो मैंने प्रिंसीपल से मिलकर बात करनी चाही, लेकिन उनके पीए ने मुझे इसकी इजाजत नहीं दी। मैंने किसी प्रकार अपने को समझाया और चंद महीने बाद होने वाली फाइनल परीक्षा खत्‍म होने का इंतजार किया ताकि बेटी का एक वर्ष बचाया जा सके।
 
 
 
 
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