Home >> Madhya Pradesh >> Guna
Change Your City
 

Go to Page << Previous1234567...1112Next >>

 
 
 
समान नागरिक संहिता पर केंद्र सरकार ने मांगी रिपोर्ट  छोटे शहरों के लिए 225 किमी की फ्लाइट का अधिकतम किराया 1,770 रुपए   दिल्ली में तय नाम मप्र में बदले गए, संघ नाराज   कोरियन तानाशाह जैसे हैं फेसबुक सीईओ, स्टाफ से टेबलें साफ कराते हैं, गालियां देते हैं   शास्त्री ने आईसीसी क्रिकेट समिति से दिया इस्तीफा  जनरल टिकट 5 मिनट और रिजर्वेशन 15 मिनट में मिलेगा  हाथी को नौवीं बार मिला नया पैर   एक हजार स्टेशनों पर लगेंगे सीसीटीवी कैमरे  सेल्फ डिक्लेरेशन से मिल जाएगा अपाॅइंटमेंट लेटर  अमरनाथ यात्रा शुरू, जम्मू से पहला जत्था रवाना  सेंसेक्स + 145.19 27,144.91   यूरो - 0.30 74.89   डॉलर -0.20 67.32   सोना + 200.00 30,100   चांदी + 1700.00 43,500  शांत हुए स्वामी, बोले- अब कम ट्वीट करूंगा   आज भोपाल, सीहोर, रायसेन समेत कई जगह होगी बारिश  उत्तराखंड में बादल फटे, जमीन धंसी, 30 की मौत, 45 लापता   प्रवीण कौशिक | फरीदाबाद |राजेंद्र बतरा| श्रीगंगानगर (साथ में दिव्य भास्कर नेटवर्क)   दिल्ली से सटी नवीन नगर सोसायटी में 1835 लोग 17 साल से अपने प्लॉट के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां उनकी जमीनों पर भूमाफिया का कब्जा है। जमीन का हक पाने के लिए एक युवक यशपाल तो पिछले 814 दिन से मिनी सचिवालय के सामने धरने पर है।   राजस्थान के श्रीगंगानगर में 2000 से ज्यादा केस जमीन के लिए भाई-बहनों, जेठानी-देवरानी और सास-बहू के बीच चल रहे हैं। अहमदाबाद के ओगणज गांव में आधी सदी से तीन पीढ़ियां 12 हजार वर्गफीट जमीन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है।   यह सिर्फ तीन मामले नहीं है, जमीनों से जुड़ा सबसे बड़ा सच है। देश में सबसे ज्यादा मुकदमे जमीनों के ही हैं, सबसे पुराना मुकदमा भी जमीन का है। ‘दक्ष सर्वे के मुताबिक-देश में लंबित 73 लाख सिविल मुकदमों में 66% जमीन से जुड़े हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर जमीन प्रक्रिया और रिकॉर्ड सुधर जाए तो अदालतों से 60% तक यानी करीब 30 लाख केस खत्म हो सकते हैं। जमीनी रिकॉर्ड सही करने के लिए केंद्र पिछले 28 साल में तीन बार प्रोग्राम लॉन्च कर चुका है। लेकिन कई राज्य सरकारों ने तो फंड की आधी राशि भी इस्तेमाल नहीं की।   52 साल , तीन पीढ़ियां और एक रुका हुआ फैसला पेज | 4         पेज एक का शेष     देश में सबसे पहले 1988 में जमीनी रिकॉर्ड को कंप्यूटराइज करने का काम शुरू हुआ था। 2008 में सरकार ने डिजीटाइजेशन का काम शुरू किया, राज्यों को 2017 तक यह काम खत्म करना था। रफ्तार धीमी थी, इसलिए बजट-2016 में सरकार को प्रोग्राम रीलॉन्च करना पड़ा।   52 साल , तीन पीढ़ियां, और एक रुका हुआ फैसला   अहमदाबाद के समीप ओगणज गांव के जयंतीभाई पटेल को विरासत में 12000 वर्गमीटर जमीन मिली थी, लेकिन विरासत में उन्हें कानूनी जंग भी मिली। जयंतीभाई के पिता सुरेशभाई ने सबसे पहले 1964 में इस जमीन के लिए दावा किया था। सुरेशभाई की मृत्यु के बाद वादी के रूप में जयंतीभाई जुड़े, केस आगे बढ़ाया। अब उनके भी बेटे यह केस लड़ रहे हैं। वादी-प्रतिवादियों की संख्या अब तक आठ तक पहुंच गई है। सभी पक्षकारों की ओर से 12 वकील बदले जा चुके हैं। इस केस की अगली सुनवाई 29 जुलाई तय की गई है।   यहां भाइयों के खिलाफ कोर्ट में बहनें   करणपुर (श्रीगंगानगर) की प्रभजोतकौर ने 5 साल पहले अपने भाई दिलप्रीतसिंह के खिलाफ कोर्ट में केस किया। आरोप लगाया कि वह शादी के बाद कनाडा शिफ्ट हो गई और उसके भाई ने पिता से मिली जमीन और पैतृक संपत्ति हड़पते हुए अपने नाम कर ली। मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। करणपुर के ही 28 एच में निर्मलजीतकौर व उसकी पुत्रवधू राजविंद्रकौर में 54 बीघा जमीन काे लेकर विवाद चल रहा है। श्रीगंगानगर में प्रभजोत-दिलप्रीतसिंह तथा निर्मलजीत-राजविंद्रकौर का यह इकलौता केस नहीं है, जिलेभर की कोर्ट में ऐसे 2000 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। इनमें कुछ केस बहनों ने भाइयों पर किए हैं ताे कुछ में जेठानी ने देवरानी पर केस किया है तो कुछ में पार्टी सास-बहू हैं। श्रीगंगानगर में इन केसों की तादाद ज्यादा होने की बड़ी वजह यह है कि यहां जमीनें उपजाऊ हैं। जो जमीन नहर के ही आसपास है। कीमत 20 से 30 लाख प्रति बीघा है। यानी एक मुरब्बा 25 बीघा जमीन भी हुई तो उसकी कीमत 5 से 7.50 करोड़ रुपए होती है। इसलिए कोई बहन, कोई भाई अपने हिस्से की जमीन किसी को नहीं देना चाहता।  फ्लैट में देरी पर 5 करोड़ जुर्माना, नहीं दिया तो कंपनी निदेशक जाएंगे जेल   वायुसेना को मिला पहला स्वदेशी ‘तेजस   बांग्लादेश में एक और हिंदू पुजारी की हत्या
 
 
 
 
MATRIMONY
 
विज्ञापन