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हरदा विशेष   जिले को इनकी जरूरत   कृषि कॉलेज: कृषक अशोक गुर्जर ने बताया की हरदा कृषि प्रधान जिला है। यहां की अर्थ व्यवस्था खेती किसानी पर निर्भर है। इसे देखते हुए लंबे समय से कृषि कॉलेज की स्थापना की मांग की जा रही है। जगह भी फाइनल हो चुकी है लेकिन नींव रखने की शुरुआत अभी तक नहीं हो सकी। कॉलेज खुलने से खेती किसानी के आधुनिक तौर तरीके नई पीढ़ी सीख सकेगी। इससे बदलाव और विकास संभव होगा।   गर्ल्स स्कूल व कॉलेज: शिक्षक एवं साहित्यकार ज्ञानेश चौबे ने बताया की शहर में एकमात्र सरकारी कॉलेज है। गर्ल्स स्कूल भी एक ही है। पुराने सरकारी कॉलेज को गर्ल्स कॉलेज में बदलने व नया कहीं और बनाने की घोषणा तत्कालीन व प्रदेश के दिवंगत उच्च शिक्षा मंत्री स्व लक्ष्मण सिंह गौड़ ने हरदा में की थी। लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। गर्ल्स स्कूल की जरूरत पर भी जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं हैं। खिरकिया में मॉडल कॉलेज, तहसीलों में आईटीआई की मांग भी अधर में हैं।   फूड पार्क नहीं बना: युवा किसान भगवान जाट का कहना है, जिले में सालों पहले से फूड पार्क का निर्माण प्रस्तावित है। जगह सुल्तानपुर में तय की गई। बाद में राजनीतिक खींचतान के बीच मामला अधर में लटक गया। राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी भी इसमें एक रोड़ा बनकर अटकी हुई है। फूड पार्क बनने से उद्योग के लिए विकास व बेरोजगारों हाथों को काम मिलने की आस है।   फुट ओवर या अंडर ब्रिज: जन चेतना मंच के अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा का कहना है, रेलवे ट्रैक पर बनी फाटक ट्रेन गुजरने पर बंद रहता है। इससे क्रासिंग के दोनों ओर जाम लगता है। शहर की जनता दशकों से फुट ओवर ब्रिज या अंडर ब्रिज की मांग कर रही है। सांसद, विधायक, प्रभारी मंत्री, सीएम, रेलवे के जीएम, डीआरएम समेत सभी को सैकड़ों ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं लेकिन केंद्र व राज्य सरकार के बीच पूरा मामला अटका पड़ा है।  जिले को यह मिला   केंद्रीय विद्यालय: जिले को केंद्रीय स्कूल की सौगात मिली। निर्माण के लिए 10 एकड़ भूमि को लेकर लंबी लड़ाई चली। वृद्धाश्रम में चलता रहे स्कूल में दाखिले बंद हो गए। स्कूल बंद होने की नौबत आ गई। जागरूक पालकों ने कोर्ट की शरण ली। तब अबगांव खुर्द की जमीन से साइलो प्लांट का कब्जा हटा। अब भवन निर्माण का रास्ता साफ हुआ है।   छीपानेर का पुल: नर्मदा नदी पर छीपानेर में करोड़ों की लागत से पुल बन रहा है। इस पुल के बनने से हरदा और भोपाल के बीच का फासला कम हो जाएगा। अभी भोपाल सीहोर जाने के लिए देवास जिले के संदलपुर से होकर जाना पड़ता है। नर्मदा पर पुल बनने से करीब 40 किमी की दूरी कम हो जाएगी। हरदा छीपानेर रोड़ का काम पूरा हो गया है। अब लोग इलाज व खरीदी के लिए इंदौर के बजाय कम समय में भोपाल जा सकेंगे।   ब्लड बैंक: जिले के ब्लड बैंक की सुविधा भी लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद मिल गई है। यहां ब्लड स्टोरेज की क्षमता कम है। इस कारण अक्सर रक्तदान के लिए कैंप लगने पर एकत्रित होने वाला खून सुरक्षित रखने के लिए इंदौर भोपाल भेजा जाता है। वहीं स्थानीय स्तर पर मरीजों को आसानी से खून के बदले खून मिल जाता है। इस व्यवस्था से कई लोगों की समय पर खून मिलने से जान बची हैं।   100 बेड हैं 300 की जरूरत: 60 बिस्तर वाले पुराने अस्पताल का उन्नयन कर इसे 100 बिस्तरों वाला कर दिया गया है। लेकिन अब रोगियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। ऐसे में इसे 300 बेड का अस्पताल करने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसे पूरा करने के लिए शासन व प्रशासन के बीच पत्राचार का सिलसिला भी शुरु हो गया है। अभी कई बार मौसमी बीमारियों के दौरान रोगी बढ़ने पर फर्श पर मरीजों को उपचार कराना पड़ता है।  जिला बनने के 17 साल बाद भी कई सुविधाओं का इंतजार   तीन साल पुराने मामले में डोलरिया के सचिव को एक साल की सजा   बच्चों को शुरू से ही अच्छे संस्कार देना चाहिए: जोशी   अमरनाथ रवाना हुआ जत्था   बारूद के अवैध गोदाम में आग लगी, एक की मौत, एक घायल   टिमरनी <img src=images/bulletblack.png<img src=images/p1.png>खिरकिया <img src=images/bulletblack.png<img src=images/p1.png>सिराली   पेयजल टंकी बनेगी   भुआणा महासभा ने स्कूली बच्चों को दी स्कॉलरशिप   तीन माह में दूसरी बार लगी गोशाला के भूसे में आग   भाजपा की महा जनसंपर्क अभियान को लेकर आज से   कांग्रेस की बैठक, चुनाव को लेकर हुई चर्चा   मांगों को लेकर संघ आज देगा ज्ञापन   60 आदिवासी युवाओं को मिलेगा राेजगार   समाधान आॅनलाइन 7 जुलाई को
 
 
 
 
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