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हार्दिक आभार   नारनौंद-हांसी क्षेत्र के सभी विज्ञापनदाताओं एवं सभी सुधी पाठकों का दैनिक भास्कर परिवार की ओर से गणतंत्र दिवस पर नारनौंद-हांसी विशेषांक निकलने पर हार्दिक धन्यवाद। आशा है कि यह सहयोग आगे भी बना रहेगा। दैनिक भास्कर की ओर से गणतंत्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं।     कप्तान सैनी,   विज्ञापन विभाग दैनिक भास्कर,   हांसी-नारनौंद। मो. ९४६७६-८३६७८  भारत को गणतंत्र देश बनाने में हरियाणा की भूमिका  हार्दिक आभार   नारनौंद क्षेत्र के सभी विज्ञापनदाताओं एवं सभी सुधी पाठकों का दैनिक भास्कर परिवार की ओर से राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर नारनौंद-हांसी विशेषांक निकलने पर हार्दिक धन्यवाद। आशा है कि यह सहयोग आगे भी बना रहेगा। गणतंत्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं।     लालबीर गौतम ,   संवाददाता दैनिक भास्कर,   नारनौंद। मो. ९८१२८-७०९६९  हार्दिक आभार   हांसी क्षेत्र के सभी विज्ञापनदाताओं एवं सभी सुधी पाठकों का दैनिक भास्कर परिवार की ओर से राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर हांसी विशेषांक निकलने पर हार्दिक धन्यवाद। आशा है कि यह सहयोग आगे भी बना रहेगा। गणतंत्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं।     सर्वेश कुकरा ,   संवाददाता दैनिक भास्कर,   हांसी। मो. ९८९६९-९९१९९  हरियाणा में भी स्वतंत्रता के आंदोलन की गतिविधियां बहुत तेज थी, यह क्षेत्र भौतिक रुप से पिछड़ा हुआ था, क्योंकि यहां के शासक लूटपाट करते रहते थे। यहां पर पढऩे वाले अकालों ने भी बहुत सारे लोगों और जानवरों को मौत के घाट उतार दिया, इसमें कोई संदेह नहीं हरियाणा की जनता अंगे्रजों के सख्त खिलाफ थी, जब हरियाणा के लोगों को पता चला कि मेरठ में आंदोलन भड़क गया है, तो यहां के लोगों ने इसका स्वागत किया और इसमें भागीदारी जताने की ओर अग्रसर हुए गुडग़ांव, रोहतक, हिसार, पानीपत, थानेसर और अम्बाला जिले विद्रोह करने के लिए आगे आए। इस विद्रोह में प्रत्येक वर्ग और जाति के लोग शामिल थे, जो अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार थे। हरियाणा का विद्रोह इतना शक्तिशाली था कि पंजाब को भी पीछे छोड़ दिया और हरियाणा के सारे मुख्य आंदोलनकारी जैसे झज्जर, फारुखनगर, बहादुरगढ़, दुजाना, वल्लभगढ़ इत्यादि से आंदोलनकारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। हरियाणा के लोग सौभाग्यशाली थे कि उन्हें सदरुद्दीन मेवाती मेवात में, राव तुलाराम रेवाड़ी में, मोहम्मद अजीम हिसार में, जनरल एबडस समद खान झज्जर में, नवाब समद खान सिरसा में, रामो जाट करनाल में, इमाम कलंदरी पानीपत में जैसे महान नेताओं और अच्छे नेताओं का नेतृत्व मिला। दिल्ली को कब्जे में लेने के बाद अंगे्रजों ने उनके सबसे अनुभवी कमाण्डरर्स को हरियाणा को कब्जे में लेने के लिए भेजा। इन कमाण्डरर्स ने हरियाणा पर चारों दिशाओं से हमले किए लेकिन बहादुर हरियाणा के लोगों ने इस लड़ाई को बड़ी बहादुरी से लड़ा। इस लड़ाई में नारनौल, बल्ला (पानीपत) और मेवात ने लड़ाई में नवंबर 1857 में भाग लिया, जो कि कुछ देरी से था, लेकिन उन्होंने इसमें पूरे जोश से प्रदर्शन किया। कुछ सकारात्मक कारणों से उनकी हार निश्चित थी, लेकिन यह भी अविश्वसनीय था कि अंगे्रजों ने जीतने के बाद भी हरियाणा के बहादुरों के त्याग व बलिदान की तारीफ की। अंगे्रजों ने हरियाणा में हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया और करोड़ों रुपए की संपत्ति को नष्ट कर दिया।   उन्होंने 80 से ज्यादा गांव को जला दिया, जिसमें अकेले मेवात में 60 से ज्यादा गांव शामिल थे। अंगे्रजी राज में हरियाणा का लगभग बहुत सारे भाग पंजाब में आता था, कुछ भाग जैसे लोहारु, नाभा, जींद और पटियाला को नवाब स्टेट्स के अधीनस्थ शासित किया जाता था। 1857 के विद्रोह के दौरान इस क्षेत्र से कुछ क्रांतिकारी जिसमें राव तुला भा शामिल हैं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बाद में भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई में हरियाणा के लोगों ने भाग लिया और बहुत सी लड़ाईयां में भी जीत भी दिलाई, केवल कुछ क्षेत्रों के प्रमुखों ने ही नहीं, बल्कि किसानों ने भी इस लड़ाई में भाग लिया।   अंगे्रजी सेना को बहुत सारी जगह हराया गया, जिसमें सोनीपत, रोहतक, सिरसा और हिसार मुख्य रुप से शामिल है। सिरसा में प्रसिद्ध लड़ाई जिसे चोर-मोर के नाम से जाना जाता है, लड़ी गई थी, बाद में सर छोटू राम जैसे प्रमुख क्रांतिकारी ने पंजाब राज्य की भूमि पर महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। राव तुला राम 1857 की विद्रोह में सबसे महत्वपूर्ण क्रांतिकारी नेतृत्वकर्ता रहे।