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    तालाब से अब बदबू नहीं आती, खिल रहे कमल   इंदौर-पटना रेल हादसे की जांच गुजरे जमाने की फ्लॉपी पर टिकी   एक अधिकारी और तीन जिम्मेदारी   शिक्षकों की धमकी रंग लाई, मिला पैसा   फिर भी अधूरी रह गई उनकी हसरत...   ऑडिट शुल्क के एक हजार रुपए लगेंगे!   महेंद्र तिवारी <img src=images/p3.png<img src=images/p1.png> इंदौर   डीएवीवी और उससे संबद्ध 300 से ज्यादा कॉलेजों में होने वाली परीक्षाओं के प्रश्नपत्र और दूसरी गोपनीय सामग्री की प्रिंटिंग फिलहाल यूनिवर्सिटी की आरएनटी मार्ग स्थित प्रेस में होती है। यहीं से परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न-पत्र पहुंचाए जाते हैं। इंदौर लोकल से लेकर दूर-दराज के इलाकों में प्रेस का स्टाफ ही वाहनों से सारी सामग्री पहुंचाता है। इसमें काफी मुश्किल आती है।   गोपनीय सामग्री को पूरी सुरक्षा के साथ परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में ना केवल कई कर्मचारी लगते हैं, बल्कि वाहन और कर्मचारियों पर भी बड़ी राशि खर्च होती है। इसके बावजूद गोपनीयता भंग होने का खतरा हमेशा बना रहता है। कभी-कभी किसी केंद्र पर दोबारा भी प्रश्न-पत्र पहुंचाना पड़ते हैं। यही वजह है डीएवीवी अब इस व्यवस्था को बदलना चाहती है, ताकि वाहन से सामग्री पहुंचाने का जोखिम भी ना रहे और समय और धन दोनों की बचत हो। इसके लिए अधिकारी गोपनीय सामग्री को परीक्षा केंद्रों पर डिलीवर करने के नए तरीके पर काम कर रहे हैं, जिसमें वाहन से पेपर पहुंचाने के बजाय परीक्षा केंद्रों पर ही पेपर प्रिंट किए जाएंगे।   प्रिंटिंग प्रेस के अधिकारी इधर सीधे अपने कार्यालय में बैठकर कम्प्यूटर को कमांड देंगे। उधर, सारे पेपर परीक्षा केंद्र पर लगे प्रिंटर से प्रिंट होकर निकल जाएंगे। इसमें कम्प्यूटर नेटवर्किंग, इंटरनेट और यूपीएस सपोर्ट प्रिंटरों का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक पेपर डिलीवरी में एमपी ऑनलाइन जैसे कियोस्क का भी इस्तेमाल हो सकता है।   यूनिवर्सिटी शुरुआत में पूरी योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ऐसी परीक्षाओं में लागू करेगी, जिनमें एक या दो सेंटर होते हैं। इस दौरान डिजिटल और मैन्यूअली दोनों तरीकों से पेपर भेजे जाएंगे। प्रोजेक्ट कामयाब होने पर स्मार्ट तरीके से ही सामग्री भेजने की व्यवस्था लागू होगी।