ई-पेपर
Change Your City
 
इंजीनियर्स से ज्यादा लाइफस्टाइल इंजीनियर्स की ज़रूरत है देश को   वो जो आए तो रोशन ज़माना हो गया !   आज ज़िद करेगा इंदौर, दौड़ेगा इंदौर  बच्चों के लिए श्रेष्ठ स्कूल चुनने में मदद कर रहा दैनिक भास्कर स्कूल फेयर   पिता के देहांत के बाद मां और मैं मुंबई आ गए। मुंबई सेंट्रल से रात 10 बजे आखिरी बस गुजरात जाती थी। उसके बाद वहां कोई नहीं आता था। बस स्टैंड के लैैम्प पोस्ट में रात 10 बजे बाद मैं पढ़ता था। 12 साल की उम्र तक नंगे पैर ही चला। प्राइमरी एजुकेशन के बाद स्कूल में एडमिशन के लिए मुझे 21 रुपए फीस चाहिए थी। उसे जुटाने में हमें 21 दिन लगे वह भी चौपाटी पर रहनेवाले एक परिचित से उधार लिए थे।  जोगी भड़क वॉटरफॉल कुछ जगहों की खूबसूरती उनके रास्तों में होती है
 
 
 
 
MATRIMONY
 
विज्ञापन