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Film Fest   सिटी रिपोर्टर Ã शहर में चल रहे दो दिनी साउथ एशिया डॉक्यूमेंट्री फिल्मोत्सव का रविवार को समापन हुआ। फिल्मोत्सव का तो समापन हुआ, लेकिन यहां दिखाई गई फिल्में जैसे एक नई शुरुआत कर गईं। सोचने-समझने का नया अंदाज़ दे गईं। शहर के सिनेप्रेमी और युवा फिल्मकारों को यह फिल्म समारोह एक नया नज़रिया दे गया। यह बात इन फिल्मों को देख लौटने वाले खुद ही कह रहे थे। पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी चार फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई।   पहली फिल्म थी नो फायर ज़ोन। यह फिल्म श्रीलंका में 26 साल तक चले लंबे गृहयुद्ध के अंतिम महीनों की कहानी है। युद्ध में तकरीबन 70 हज़ार निर्दोष नागरिक मारे गए थे। कालम माकरे की इस फिल्म में उस कालखंड के वास्तविक दृश्य हैं। कैसे नो फायर ज़ोन को सेफ कहकर लोगों को यहां तक लाया गया और फिर उन पर क़हर बरपाया गया। इस फिल्म को देखकर हॉल में बैठे हर शख्स की आंखें नम थीं। बच्चों पर बरसती गोलियों ने राजनीति के चेहरे की वीभत्सता को सामने लाकर रख दिया। ये विश्व की दुर्लभतम फिल्मों में शामिल है। इस फेस्टिवल के सिवाय इसे और कहीं देखा नहीं जा सकता।  वोमैड फेस्टिवल में शहर की हिस्सेदारी   इंदौर आर्ट मेट की ऑनलाइन अादरांजलि 1 अप्रैल से
 
 
 
 
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