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    क्यूरिओसिटी : चेहरे के काले रंग के इस हिस्से में सूखी मिट्‌टी की दरारें पड़ी हैं। यह बताती है कि काला धन कमज़ोर हुआ है। लेकिन आगे क्या होगा। यह सवाल भी छोड़ जाती है।   कन्फ्यूज़न : सफेद हिस्से के बाल काले और काले हिस्से के सफेद हैं। इसमें कॉमनमैन का कन्फ्यूज़न बताया गया है। वह समझ नहीं पा रहा कि पास्ट बेहतर था या फ्यूचर अच्छा है। यह सवाल बना हुआ है।   होप : अंत में जवाब तलाशने के लिए प्रकृति का सहारा लिया गया है। गर्दन के हिस्से पर पानी और पेड़ के प्रतीक से यह बात दोहराई गई है। हरियाली यानी अच्छा वक्त आने में अभी समय लगेगा।  साहस की अभिव्यक्ति होती है अहिंसा   सिटी रिपोर्टर <img src=images/p3.png<img src=images/p1.png> वो गली में क्रिकेट खेलना.. छुट्‌टियों में छत पर सोना.. पड़ोस में रहने वाली सहेली से स्कूल में लड़ लेना बाद में शाम को घर जाकर पूछना- चल खेलें!! ये बचपन की खट्‌टी-मीठी यादों की वो जमापूंजी है जो कभी खत्म नहीं होती। वक्त तो ब्याज बनकर और इज़ाफा कर देता है। एक कैफे में जुटे यंगस्टर्स के समूह ने दिल खोलकर यादें ताज़ा की। इस दौरान चालीस से अधिक युवा जुटे। इसमें से कुछ ने अपनी मौजूदा स्थिति का श्रेय बचपन के उन मुश्किल हालातों को दिया जिसमें इन्हें संघर्ष करना पड़ा। सिटी भास्कर ऐसे ही दो यंगस्टर्स की कहानी शेअर कर रहा है:  मुंबई की नाट्य संस्था नाटक करने आई लेकिन रास्ते में ही बस के खराब होने के कारण वह लेट हो गई। दर्शकों ने उस बस के आने के बाद बस से प्रापर्टी उतारने से लेकर मंच सज्जा करने में मदद की। यह नाटक नियत समय से डेढ़ घंटे देर से यूसीसी अॉडिटोरियम में शुरू हो पाया। यह देखकर दर्शको की पहली प्रतिक्रिया यह थी कि किस तरह से आयोजको और कलाकारों की सहायता की जाए। यह देखकर मुंबई के कलाकारों ने भी कहा कि यह इंदौर में ही संभव है।  शाहजहांनी दाल बनाकर देखिए