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    शहर के छह चित्रकारों की प्रदर्शनी गोवा में 10 से   अनुब्रत चैटर्जी  जंगल बुक की लिटिल स्टोरीज़   शकर खाने से भी होता है गाउट   संजय पटेल <img src=images/p3.png<img src=images/p1.png> ख्यात कबीर गायक प्रहलादसिंह टिपानिया कहते हैं कि सन् 1974 में ट्रेनिंग के बाद शिक्षक बना। गणित और विज्ञान पढ़ाने के लिए उज्जैन ज़िले के छोटे छोटे गांवों में ख़ूब घूमा। सन् 78-79 में शिक्षक का कर्म करते हुए ही अंतस में कबीर प्रकट हुए और तंबूरे पर गाते हुए अपनी मीठी मालवी के साथ देश-विदेश में प्रस्तुतियों का सिलसिला प्रारंभ हो गया। सोचता था शिक्षक के रूप में निवृत्त होकर कुछ आराम करूंगा, स्वाध्याय करूंगा और परिवार,खेत-खलिहान में समय बिताउंगा लेकिन कबीरबानी का प्रचार मुझे अब और दौड़ा रहा है। इसे अपने दाता की बंदगी समझ कर काम में लगा हुआ हूं। यह बात उन्होंने सिटी भास्कर से बातचीत में कही। 11 दिसंबर को उनका अभिनंदन समारोह मनाया जाएगा।  रंग-अमीर और मप्र रूपंकर पुरस्कार के लिए प्रविष्टियां मंगाई   दिव्यांगों के लिए एक्जाम में दी जाएंगी सहूलियतें