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कै?पस   \&   काउंसलिंग   विशेष पेज पढ़े कल  सिटी रिपोर्टर. इंदौर     ‘बाबूजी से ‘पापा तक के सफर में पीढिय़ों के फासले कुछ कम हुए हैं। ...और अब ‘पा बेस्ट फ्रेंड बन गए हैं। उन्हें १४-१५ घंटे भी काम करना होता है। ऐसे में किसी ‘पा की नन्ही परी तो किसी का सुपरमैन बेटा ‘फादर्स डे पर उन्हें अपनी तरह से क्वालिटी टाइम देना चाहता है। जब पापा लाड़ करते हैं तो बच्चे भी अपने अंदाज में ऐसा ही रिटर्न गिफ्ट देना चाहते हैं। वे पापा को भी बबल्स उड़ाने को कहते हैं। उनके चेहरे के कैनवास पर उन्हीं की कूची से रंग देते हैं। हर बात के लिए जिद करते हैं। वे जानते हैं कि मासूमियत भरी आवाज में जिद करना भी पापा के लिए गिफ्ट की तरह है। छोटी जिद पापा के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला देती है। पापा के साथ बच्चों के बिताए इसक्वालिटी टाइम को हमने तस्वीरों में कैद किया।  ‘पा तो इसलिए हैं मेरे बेस्ट फ्रेंड