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तीन दिनी कल्चरल फेस्ट प्रतिबिम्ब की शुरुआत   गाड़ी सबसे पहले खां साहब को मिलना चाहिए   अब एफएम रेडियो को भारी लोकप्रियता मिली है लेकिन रेडियो को सरोकारों को बदलना होगा। प्रसारण केवल एक ही समूह से हटाकर समग्र समाज के लिए बनाना होगा। उसे मनोरंजन के साथ ज्ञान पर एकाग्र करना होगा। एक बार बड़े गुलाम अली खां साहब रेडियो आए तो उन्हें लाने-ले जाने के लिए रेडियो ने वाहन उपलब्ध कराया। स्टेशन डायरेक्टर ने जब प्रसारण के बाद जब खां साहब बैठे हुए मिले तो उन्होंने अधिकार से पूछा कि क्या वाहन नहीं है? तो उसने बताया कि फलां साहब को गाड़ी छोड़ने गई है। डायरेक्ट ने उस अधिकारी से पूछा - यदि हम यहां खां साहब को क्लासिकल म्यूजि़क कैटेगरी के पद के लिए खां साहब के स्तर के आदमी ढूंढे तो कितने उम्मीदवार मिलेंगे। अधिकारी ने कहा-मुश्किल से दो-चार। स्टेशन डायरेक्टर ने कहा- मूर्ख, आईएएस के लिए सैकड़ों उम्मीदवार मिल जाएंगे, संगीत के लिए नहीं।  गारमेंट के लिए वेलवेट फैब्रिक इस्तेमाल किया क्योंकि यह टेक्सचर्ड होता है और इस पर रोशनी पड़ती है तो यह ग्लो करता है। इसे दीये का स्ट्रक्चर देना भी आसान हो गया। इसी के साथ ड्रेप्स देने के लिए दीपक की लौ जैसा सॉफ्ट शिफॉन यूज़ किया। स्ट्रक्चर्ड ड्रेसेस आजकल पसंद की जा रही हैं इसलिए इन्हें इसी तरह बनाया। शो में प्रेज़ेंट किया तो ड्रामा क्रिएट करने के लिए ड्रेसेस में लाइट्स भी लगाईं ताकि दीपक राग को सार्थक कर सकें। इसी तरह राग वसंत से प्रेरित कलेक्शन भी बनाया। चूंकि वसंत में फूल ही फूल नज़र आते हैं इसलिए ड्रेसेस में फ्लोरल मोटिफ और फूलों के एम्बेलिशमेंट्स इस्तेमाल किए।   कालिदास की कविताओं पर भी बना चुके हैं कलेक्शन   फैशन इंस्टिट्यूट के प्रिंसिपल हेमंत कौशिक ने बताया कि संस्कृति से ललित कलाओं और फैशन को हमें ही कुछ न कुछ नया मिलता है। हमारी संस्कृति इतनी उन्नत है कि प्रेरणा लेने के लिए हमें कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है। रागमाला पर आधारित इन गारमेंट्स को हम 8 मई को बिलावली तालाब स्थित हमारे संस्थान में होने वाले फैशन शो में प्रेज़ेंट करेंगे। इन्हें खरीदा और ऑर्डर भी किया जा सकेगा।  स्टूडेंट्स के बनाए वेंचर्स की मदद के लिए फंडिंग कॉनक्लेव   कुछ डिशेस सरप्राइज़ देती हैं, जैसे पालक-दही
 
 
 
 
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