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    सितार पर अद् भुत रागमाला और ठुमरी में विरह रस   जात-पांत और भेदभाव का विरोध   उन्होंने कहा कि यह नाटक शिवाजी सावंत के ख्यात उपन्यास मृत्युंजय पर आधारित है। मैंने उपन्यास के कुछ खास प्रसंगों को चुनकर यह नाटक रचा है। इसका नाट्य रूपांतर ख्यात कवि राजेश जोशी ने किया है। मैंने इसमें यह दिखाने की कोशिश की कि है कि किस तरह से कर्ण को हर मौके पर अपमानित किया गया। ये प्रसंग गहरे सामाजिक और राजनीतिक अर्थ लिए हुए हैं जिसमें हमारे देश में फैली जात-पांत, भेदभाव को सांकेतिक रूप से अभिव्यक्त करने की कोशिश की है। वे कहते हैं कि कर्ण को लेकर हिंदी के महान कवि रामधारीसिंह दिनकर ने जबर्दस्त कविता लिखी है रश्मि रथी। मैंने इस कविता के कुछ अंशों का इस्तेमाल किया है जिसके जरिए कर्ण के मनोभावों को दर्शा सकूं। लेकिन मैंने इसमें कर्ण के शूरवीर रूप के साथ ही उसके प्रेम, त्याग, अपमानित और योद्धा के रूप को अभिव्यक्त किया है।  फेसबुक आलोचनात्मक विवेक का कब्रिस्तान है : उदयन वाजपेयी   मूवी से मिली लर्निंग्स   n सपनों को फॉलो करें तो सपने आपको फॉलो करेंगे   n आपको चुना गया है, इस बात को कभी ना भूलें   n लेवल ज़ीरो कुछ नहीं होता, आप इसे बनाते हैं   n आपको स्वीकार करने से पहले परखा और मज़ाक बनाया जाएगा   n बीता कल इतिहास, आने वाला कल रहस्य है लेकिन आज का दिन गिफ्ट है   n एक सच्चा योद्धा कभी हार नहीं मानता  अब बॉडी वेट और बॉडी शेप के हिसाब से जूलरी का ट्रेंड