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    दिग्गज होंगे शामिल   इसमें खासतौर बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ, स्वस्छ भारत और स्वस्थ भारत पर भी फिल्में दिखाई जाएंगी। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड और मीडिया जगत से मनोहर शेट्‌टी, मुकेश भट्‌ट, बोनी कपूर, प्रहलाद कक्कड़, उमा डिकूजा, गोविंद निहलानी, रमेश शिप्पी, अनुराग बासु, मीरा चोपड़ा, ईला अरुण, रुमी जाफरी, गजेन्द्र चौहान, सोमना चक्रवर्ती, गीताजंलि राव, गोपी देसाई, नीता वशिष्ट, चार्ल्स थॉमसन, अतुल तिवारी, हैदर खान, केतन मेहता और दीपा मेहता, हिमानी शिवपुरी, कुमार विश्वास सहित अमेरिका से जैफरी डि ब्राउनराउनकई हस्तियां शामिल होंगी।  11 इंदौरियों को मिलेगा 12 को इंदौरी रत्न सम्मान   पत्थरों की आवाज़ बनकर किलों में धड़कता शौर्यमय इतिहास   सिटी रिपोर्टर <img src=images/p3.png<img src=images/p1.png> वॉक फॉर सोल 11 दिसंबर को होगी। यह वॉक गीता भवन चौराहे से सुबह 6.45 बजे से निकाली जाएगी और प्रीतमलाल दुआ सभागृह तक पहुंचेगी। यहां शहर के स्टूडेंट्स और गायक-गायिकाएं गीतों की प्रस्तुति देंगे। इसमें शामिल होने और स्टूडेंट्स को मोटिवेट करने के लिए पूर्व हॉकी प्लेयर मीररंजन नेगी इसमें शामिल होंगे।  सिटी रिपोर्टर <img src=images/p3.png<img src=images/p1.png> महिलाओं का पसंदीदा रंग गुलाबी और पुरुषों का सुर्ख लाल है। रंगों से उपजे लिंगभेद को खत्म करने के लिए यूनाइटेड नेशंस ने ऑरेंज द वर्ल्ड की कल्पना की है क्योंकि इस रंग को किसी लिंग से नहीं जोड़ा जाता। यह लिंगभेद को खत्म करने की एक पहले है। शहर के आंत्रप्रेन्योर्स के एक ग्रुप ने यूएन के इस इनिशिएटिव से इन्स्पायर होकर जेंडर इक्वालिटी के लिए कदम उठाए हैं। वे अपने ऑर्गनाइज़ेशन में पुरुषों के साथ या कहीं-कहीं उनसे ज्यादा महिलाओं को प्राथमिकता देंगे और बनाएंगे जेंडर इक्वालिटी का एक ऑरेंज वर्ल्ड।   विज़िनम ग्रुप के चेयरमैन करनवीर सिंह ने बताया कि कई मायनों में महिलाओं की क्षमता पुरुषों से अधिक होती है लेकिन पारंपरिक सोच के कारण उस क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता। महिलाओं की अंग्रेजी पर पकड़, कम्यूनिकेशन स्किल, मुद्दों पर सोचने की क्षमता इसका परिचायक है। इन खूबियों को ध्यान में रखकर ग्रुप के 100 आंत्रप्रेन्योर्स ने शपथ ली है कि वे अपने ऑफिस में एनालिस्ट, स्ट्रेटेजिक प्लानर या ऑफिस बोर्ड में जगह देंगे। रविवार सुबह सभी आंत्रप्रेन्योर्स ने इस बात की शपथ भी ली। ग्रुप की वृद्धि दोषी और अंकिता दोषी कहती हैं कि हमारी सोसायटी अभी भी प्रोफेशनल लाइफ में फिमेल्स को एक्सेप्ट नहीं कर पाती है। लिंगभेद अब भी बना हुआ है। यूनाइटेड नेशन्स का ऑरेंज वर्ल्ड इसी लिंगभेद को खत्म करने के लिए एक बड़ा इनिशिएटिव है। यह समाज के नजरिए को को बदलने में सहायता करेगा और यही कारण है कि हम इससे जुड़े हैं।  सोशल गेदरिंग के सही मायने