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    सिटी रिपोर्टर <img src=images/p3.png<img src=images/p1.png> उसके हाथ में अपनी ही सुंदर तस्वीरें हैं जिन्हें देखकर वह कहती है कि मुझे मुझे तस्वीरें खिंचवाने का शौक था। अब अपना ही चेहरा देख कर दु:ख होता है। एसिड अटैक के बाद मुझे हर बंदे से अपना चेहरा छिपाना पड़ रहा है। लेकिन अब मेरा चेहरा ठीक होगा। जो होगा बेहतर होगा। यह है ज़किया, उसके शौहर ने एसिड डालकर उसका चेहरा जला दिया था। यह दृश्य पाकिस्तान की डॉक्युमेंट्री फिल्म सेविंग फेस का है। यह फिल्म एसिड अटैक से बदसूरत हुए चेहरों को बचाने की खूबसूरत कोशिशों के गहरी करुणा, संवेदना और प्रामाणिक तथ्यों के साथ अभिव्यक्त करती है। सूत्रधार फिल्म सोसायटी के इस प्रतिरोध का सिनेमा फिल्मोत्सव में इस ऑस्कर विनिंग फिल्म का प्रदर्शन प्रीतमलाल दुआ सभागृह में किया गया।  कथक में साकार किया कृष्णायन   बच्चों की वो दीदी और छक्कन चाचा कहां गए?