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    यह तुम्हारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हेल्दी सोसायटी बनाओ   हमारी समस्याएं हैं हेल्थ, एजुकेशन, एम्प्लॉयमेंट, हाउसिंग। लेकिन इन पर कोई बात नहीं करता। कोई पार्टी बात नहीं करती। मैं किसी पार्टी का नहीं, मेरी पार्टी एक ही है और वह इंडिया है। तो हमारी असल समस्याओं पर कोई बात नहीं करता। हमारा देश यूथफुल नेशन है। बहुत जोश एनर्जी है लेकिन आपका ध्यान गलत बातों की ओर लगाया जा रहा है। लेकिन आपको अपने दिमाग की खिड़कियां खुली रखनी है। सोचना है, सवाल करना है। यही जनतंत्र है। जनतंत्र हमारी मिट्टी में उतर गया है। वह हमारा स्वभाव-संस्कार बन गया है। हमने प्रगति में बहुत कुछ छोड़ दिया है। कला-साहित्य, शायरी-पेंटिंग, लोककथाएं-गीत। इनसे कलेक्टिव विज्डम बनता था। धर्म का नाम पर बहुत कुछ गलत होता है लेकिन एज़ ए इंडियन आपका धर्म सिर्फ इंडिया है। अब यह तुम्हारी जिम्मेदारी है कि गलत मूल्यों और परंपराओं को खत्म करो। इसी तरह आप एक हेल्दी सोसायटी बना सकते हंै।  श्रद्धा चौबे <img src=images/p3.png<img src=images/p1.png> ये देश के ऐसे यंग फैशन डिज़ाइनर्स हैं जिन्होंने लेटेस्ट फैशन के लिए ट्रेडिशनल हेंडलूम टेक्नीक और ऑर्गेनिक फेब्रिक का उपयोग कर कपड़े डिज़ाइन किए हैं। पर्यावरण हित में इनका प्रयास इनकी संवेदनशीलता दर्शाता है। विद्या बालन जैसी सेलिब्रिटी भी यह फैशन पसंद करती हैं। सिटी भास्कर ने मुंबई और चेन्नई की दो ऐसी ही डिज़ाइनर से बात की जिन्होंने इको-फैशन पर काम किया है। दोनों का कहना है कि क्रिएटिविटी इनबोर्न टैलेंट हैं। इसे कोई इंस्टिट्यूट या कोर्स नहीं सिखा सकता।   मुंबई की यंग फैशन डिज़ाइनर विभूति बहल कहती हैं कि भारत में इको फ्रेंडली फैशन का कन्सेप्ट बढ़ा है। यंगस्टर्स इसके लिए कॉन्शस हैं। डिज़ाइनिंग किसी इंस्टिट्यूट में जाकर नहीं सीखी जा सकती। क्रिएटिविटी इंसान के भीतर होती है। अगर आप में पैशन है तो इसे रचनात्मकता में उतारें। मेरी यही स्ट्रेंथ है जो मेरे काम में दिखाई देती है। बॉलीवुड में विद्या बालन ऐसी स्टार हैं जिन्हें हेंडलूम फेब्रिक और इंडियन स्टाइल पसंद है। वे एग्ज़ीबिशन में जाकर ऐसे डिज़ाइनर तलाशती हैं जो हेंडलूम पर वर्क करते हैं। मेरी मुलाकात भी इसी कवायद के तहत विद्या से हुई। उनकी एक फिल्म के प्रमोशन के लिए मैंने ड्रेस डिज़ाइन किए थे। इसी तरह नंदिता दास को भी कॉटन फेब्रिक पसंद है। डस्की लुक और टिपिकल इंडियन फीचर्स साड़ी उन्हें दिलकश बनाती हैं। वे कहती हैं कि लोगों को फिगर पर नहीं मन की सुंदरता पर फोकस करना चाहिए। यही आपके परिधान को फैशन में तब्दील करता है। डिज़ाइनर ड्रेस से अधिक आपने वे कैसे कैरी किए है, वह महत्वपूर्ण है। इन दिनों ट्रेंड में लूज़ और लांग कुर्ते ट्रेंड में हैं।  सिटी रिपोर्टर <img src=images/p3.png<img src=images/p1.png> एक कॉलेज में शुक्रवार को मैनेजमेंट फेस्ट यूटोपिया आयोजित किया गया। फंताक्षरी, फेसपेंटिंग, फायरलेस कुकिंग, बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट, टी शर्ट पेंटिंग, कोलाज मेकिंग और रंगोली सहित कई प्रतियोगिताओं में शहर के कई कॉलेजों के स्टूडेंट्स ने अपनी प्रतिभा दिखाई।   मेरा नाम जोकर पर हुई फेस कॉम्पीटिशन   सबसे बड़ा आकर्षण था मेरा नाम जोकर थीम पर हुई फेस पेंटिंग कॉम्पीटिशन। इसका मकसद था कुछ ऐसा पेंट करना जिसे देखकर तनावभरी जिंदगी में खुशी के कुछ पल आ जाएं। इसमें करीब 10 पार्टिसिपेंट्स ने हिस्सा लिया। इसमें सिद्धार्थ प्रजापत और वैभव अग्रवाल प्रथम रहे। अक्षत और गौतम जैन ने दूसरा स्थान हासिल किया। टी शर्ट पेंटिंग की थीम हम सब एक हैं पर स्टूडेंट्स ने अपनी क्रिएटिविटी दिखाई। साक्षी भंडारी और रूपल शाह प्रथम रहे। मुस्कान सक्सेना और प्रणव मल्हन की टीम ने दूसरा स्थान हासिल किया।  फिदेल कास्त्रो पर फिल्म प्रदर्शन और परिचर्चा आज   कलमकारी और चिकनकारी का फ्यूज़न, गोल्ड की ज़री का वर्क  विंटर सीज़न में कैसा हो आपका स्टाइल