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रंगों से बयां हुए भाव  ईव टीजिंग पर लीगल एक्शन की दी जानकारी  कर्म और गुण के सिद्धांत पितरों से सीखें   प्राचीनकाल में लोग इंडियन कहलाना ज्यादा पसंद करते थे, लेकिन अब एक आबादी ऐसी भी है जो मॉडर्नाइजेशन की परिभाषा बदल खुद को अमेरिकन कहलाना ज्यादा पसंद करने लगी है। प्राचीन भारत में कभी भी कास्ट सिस्टम नहीं रहा। लेकिन समय के साथ जातिवाद बढ़ता गया। तब मैरिट के आधार पर तरक्की हुआ करती थी। गुण कर्म यानी परफॉर्मेंस को आधार माना जाता था। लेकिन वक्त के साथ हम कर्म गुण के सिद्धांत को भूलते चले गए। यहां एंसेस्टर्स यानी पितरों से सीखने की जरूरत है, कर्म पर विश्वास करें, बजाय अपने जातिसूचक सरनेम के।  आज से जमेगा ग्राउंड पर गरबा का रंग  मधुबाला और वैजयंती माला बनकर रैम्प पर चली लेडीज  3 अक्टूबर से जयपुराइट्स के लिए कोलकाता की चाट  {डॉ. विजय पाठक प्रो.कार्डियोलॉजी, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
 
 
 
 
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