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    भास्कर न्यूज नेटवर्क | चेन्नई   जयाजैसे-जैसे उठती गईं, शशिकला पनपती गईं। जया के अपने छूटते गए और शशिकला के जुड़ते गए। जया से परिचय, उनकी प्रतिष्ठा और प्रभाव तीनों ने उनका जीवन बदल दिया।   जब शशिकला1989 में जया के घर शिफ्ट हुईं तो साथ 40 नौकरों को लेकर आईं। ये सभी मनारगुड़ी से थे, जहां शशिकला पैदा हुई थीं। एक किसान के घर में। जया के पोएस गार्डन हाउस में घरेलू नौकर, रसोइया, सिक्यूरिटी गार्ड, ड्राइवर और यहां तक मैसेंजर तक मनारगुड़ी का था। विरोधी तो इन्हें कई बार मनारगुड़ी का माफिया बोलती थी। ये मामूली बात नहीं है कि एक वीडियो पार्लर चलाने वाली महिला पूरे राज्य की राजनीति नियंत्रित करती हो। हां, ऐसा ही तो था। शशिकला और जया की बढ़ती नजदीकियों के बाद तो कई मंत्री और अफसर महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में शशिकला से ही पूछ लेते थे। यानी अम्मा नहीं तो चिनम्मा ही काफी हैं। शशिकला को अब चिनम्मा ही तो कहते हैं। यानी मौसी। शशिकला ने जयललिता से संपर्क बढ़ाने के लिए कम पापड़ नहीं बेेले। वो वीडियो पार्लर चलाती थीं। फिर खासतौर पर उन शादियों को कवर करने जाने लगीं, जिसमें जयललिता शामिल होती थीं। शशिकला के पति नटराजन कडलोर की कलेक्टर वीएस चंद्रलेखा के साथ काम करते थे। चंद्रलेखा तमिलनाडु के तत्कालीन सीएम एमजीआर की करीबी थीं। एमजीआर जया के करीबी थे। बस इसी कारण चंद्रलेखा ने शशिकला को जया से मिलवा दिया। 1983 में शशिकला ने जया की महिला विंग की एक बड़ी रैली को शूट किया और जया के करीब गईं जया कहती थीं ‘उडनपिरावा सगोधारी यानी हम बहने हैं बस खून का रिश्ता नहीं है। शशिकला का परिवार गरीब था, लेकिन वेे प्रभावशाली कल्लार परिवार से ताल्लुक रखती थीं। माना जाता है जब से वो जया के करीब आई, कल्लार समुदाय का प्रभाव और मौजूदगी सरकार में हर स्तर पर बढ़ी है।  बांग्लादेश में 46 साल बाद अब रिलीज़ होंगी भारतीय फिल्में  ‘50 हजार कर्मचारी, 3 हजार ब्रांच में 11 बजे तक काम कर रहे हैं, गड़बड़ी दो ब्रांच में  चीन में बच्चों के लिए बनाया स्मॉग फ्री स्टेडियम  अमेरिका से शेरनी का दूध मंगाया, शावक को बच्चों के इंक्यूबेटर पर रखा, बचा लिया  क्लास केबीसी का सेट, बच्चों को बैग छोड़ मिल रहा है वीआईपी स्टेटस  कल नो निगेटिव न्यूज के साथ करें   नए सप्ताह की पॉजिटिव शुरुआत