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जानकारों के अनुसार, एक स्कूल में औसतन दो हजार बच्चे पढ़ते हैं। इस तरह 50 स्कूल में बच्चों की कुल संख्या एक लाख हुई। एक बच्चे से वार्षिक शुल्क मिसलेनियस चार्ज दो हजार रुपए और कॉपी-किताब का तीन हजार रुपए वसूला जाता है। इस तरह प्रतिवर्ष सत्र शुरू होने के साथ अभिभावकों को न्यूनतम पांच हजार (ड्रेस छोड़कर) खर्च करना पड़ता है। यानी, हर साल दाखिले में अभिभावकों को 25 करोड़ रुपए खर्च करना पड़ता है।  क्या है स्थिति : काफीदिनों से नाली की साफ-सफाई नहीं हुई है। इसके चलते नालियां बजबजा रही हैं। गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। सड़क पर चलने के दौरान फिसलने का डर रहता है। स्कूली बच्चे अक्सर फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।  छह माह से सड़क की स्थिति काफी जर्जर हो गई है। इसकी मरम्मत कराने के लिए लोगों ने जिम्मेदारों से शिकायत की, मगर कार्रवाई के नाम पर नतीजा सिफर है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।  मौसम बदलते ही गले में खरास होना आम बात है। इसमें गले में कांटे जैसी चुभन, खिचखिच और बोलने में तकलीफ जैसी समस्याएं आती हैं। ऐसा बैक्टीरिया और वायरस के कारण होता है। कई बार गले में खरास की समस्या एलर्जी और धूम्रपान के कारण भी होती है। गले के कुछ संक्रमण तो खुद-ब-खुद ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इलाज की ही जरूरत पड़ती है। आमतौर पर लोग गले की खरास को आम बात समझ कर इस समस्या को अनदेखा कर देते हैं। लेकिन गले की किसी भी परेशानी को यूं ही नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।
 
 
 
 
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