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मुख्य खबरे

 
आया कर रहीं नर्स का काम     दो-दो नर्सों से तीन शिफ्ट में काम लिया जाता है। एक नर्स के घर में यदि काम है तो उसके बदले आया सेवा देती है। या किसी दूसरे नर्स को शिफ्ट किया जाता है। आनन-फानन में नर्स न भी आए तो उसके स्थान में आया वार्ड ब्वाय या फिर ड्रेसर काम करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस आया से झाड़ू पोंछा और साफ सफाई का काम लेना है वह मरीजों को इलेक्शन लगा रही हैं। सिर्फ इतना ही नहीं वह मरीजों को ग्लूकोज का बाटल भी लगा रही है। ऐसे में उन मरीजों का क्या होगा तो जीवन बचाने की आस लेकर अस्पताल के द्वार आए हैं।  आसान नहीं नर्सों का काम     नर्सों की सबसे बड़ी परेशानी तब होती है जब इन्हें रात को शराब के नशे में वार्ड ब्वाय के साथ काम करना पड़ता है। नर्सों द्वारा इसकी शिकायत आरएचएमओ या अस्पताल के प्रभारी से करने पर वे लिखित में मांगते हैं। जिससे उनकी परेशानी बढ़ जाती है। खास बात यह है कि ऐसे वार्ड ब्वाय से डॉक्टर भी नहीं उलझते। ऐसे में रात में अस्पताल में सेवा देना अकेली नर्स के लिए परेशानी का शबाब बन गया है। नर्सों का कहना है कि काम के दवाब और अपनी समस्याओं की जानकारी जब आरएचएमओ को देती हैं तो उन्हें सीधे काम करने कहा जाता है। जवाब में उन्हें कहा जाता है। नर्सों की मानें तो शिकायत करने पर मालखरौदा या डभरा ट्रांसफर करने की धमकी दी जाती है।  एक नजर     स्वीकृत स्टाफ 18   कार्यरत 08   स्टोर इंचार्ज 02   सेवा देने वाले 05   छुट्टी में 01   रिक्त 10  सीधी बात     प्रश्न=जिला अस्पताल में कितने नर्स होने चाहिए?   उत्तर= सेटअप के हिसाब से 18 नर्स।   प्रश्न= कितने नर्स की पोस्टिंग है?   उत्तर= अस्पताल में 8 नर्स की पोस्टिंग है।   प्रश्न= कितनी सेवाएं दे रहे हैं?   उत्तर= सिर्फ 5 नर्स।   प्रश्न= बाकी नर्स कहां हैं?   उत्तर= दो को अन्य काम में लगाया गया है और एक छुट्टी पर है।   प्रश्न= काम कैसे चलता है ?   उत्तर= किसी तरह काम चलाया जा रहा है।   प्रश्न= नर्स की जगह वार्ड ब्वाय और आया से क्यों काम लिया जा रहा है?   उत्तर= नर्स के मार्गदर्शन में उनसे सेवा ली जाती है।   प्रश्न= कहीं मरीज की हालत बिगड़ी तो क्या होगा?   उत्तर= ऐसे हालात नहीं बनते, यदि बनता है तो उसे सुधार लिया जाता है।     डॉ. एसएच श्रीवास्तव   आरएचएमओ  कैदियों से भी डर     अस्पताल में आए दिन कैदी भी भर्ती होते रहते हैं। इनके लिए पुलिस वालों की ड्यूटी लगी होती है, लेकिन पुलिस वाले चौकसी की बजाए आराम करते रहते हैं। जरूरत पडऩे पर कैदियों की पत्नियों को भी अस्पताल में बुला लिया जाता है। रात को जब नर्र्स इन कैदियों के स्वास्थ्य का जाएजा लेने जाती हैं तो उनमें डर बना रहता है। कई बार तो कैदी दरवाजा ही नहीं खोलते। जब दरवाजा खुल भी जाता है तो कैदी आपत्तिजनक स्थिति में होते हैं। पुलिस की चौकसी कमजोर होने के कारण ऐसे कैदियों की तिमारदारी करने में नर्स हमेशा भयभीत रहती हैं।  भास्कर पड़ताल त्नअस्पताल में अधिकांश काम करते हैं नर्स की जगह वार्ड ब्वाय और आया  परेशान है छात्राएं     छात्रावास वर्तमान में हरदीबाजार रोड में किराए के मकान में संचालित है। जहां छात्राओं को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। छात्रावास में कमरों की कमी है। जिसके कारण एक-एक बिस्तर में दो-तीन छात्राओं को सोना पड़ता है। बलौदा-हरदीबाजार मार्ग में सैकड़ों की संख्या में चलने वाले ट्रेलर की आवाज से नींद व पढ़ाई दोनों ही प्रभावित हो रही है।  और टै्रक हो गया जाम  दिया गया प्रशिक्षण  बिजली का बिल उड़ा रहा होश  चार साल में भी नहीं बना छात्रावास  डाक्टरों की हड़ताल से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था  कानून की जानकारी के लिए शिक्षा है जरूरी  ष्ट रू ङ्घ ्य