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मुख्य खबरे

 
छतरी का सहारा...  चावल ज्यादा और गोदाम कम     जिले में धान की बर्बादी का प्रमुख कारण चावल रखने गोदाम नहीं होना बताया जा रहा है। जिन राइस मिलों में धान जाना है वहां पहले से ही चावल का भंडार लगा है। जिससे धान का भंडारण नहीं हो पा रहा है। जब राइस मिलों में चावल रखने की जगह नहीं है तो धान को कहां रखा जाएगा अंदाजा लगाया जा सकता है। मार्कफेड के अधिकारी धान को सुरक्षित रखने का दावा कर रहे हैं, लेकिन यह दावा कहां तक खरा उतरता है यह तो आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।  ऐसी बर्बादी से भविष्य में होंगी दिक्कतें     अनाज की सुरक्षा का उपाय नहीं किया जाना चिंता का विषय है। लोगों का कहना है कि आबादी बढ़ती जा रही है और कृषि का रकबा घटता जा रहा है। यदि अनाज की बर्बादी नहीं रुकेगी तो भविष्य में दिक्कतें और बढ़ेंगी। चावल उद्योग सबसे बड़ा उद्योग है। व्यवस्थागत खामियों की वजह से हर साल शासन को करोड़ों का नुकसान होता है। किसान, खेतिहर मजदूर से लेकर ट्रांसपोर्टर, राइस मिलर्स, मिल मजदूर व गोदामों में हमाल व व्यापारी इस उद्योग से जुड़े हैं।     व्यवस्था ही है जिम्मेदार     इस साल जिले में रिकार्ड धान समर्थन मूल्य पर खरीदा गया। यह धान भी खुले आसमान के नीचे असुरक्षित ढंग से रखा गया है। धान को बचाने के लिए कोई उपाय नहीं होने से बारिश में भीगने से हजारों क्विंटल धान बर्बाद हो जाता है। धान की बोनी से लेकर उपज की खरीदी और मिलिंग तक आधा दर्जन से अधिक विभाग सक्रिय रहते हैं। जिसमें कृषि, सहकारिता, राजस्व, खाद्य, मार्कफेड, वेयर हाउस, नागरिक आपूर्ति निगम व केंद्र सरकार का एफसीआई भी शामिल है, लेकिन रख-रखाव को लेकर हर विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहता है।  लापरवाही त्नसुरक्षा के उपाय नहीं, हर साल खराब होता है हजारों क्विटंल धान, निचले हिस्से में कैप कवर नहीं करता काम  अस्पताल परिसर में बन रही गुणवत्ताहीन सड़क  प्रेम प्रसंग के कारण हुई थी दपंत्ती की हत्या  धूल का गुबार  दफ्तर में धूल खा रहे पटवारियों के कम्प्यूटर  फिर खतरे में दो अरब का धान  ष्ट रू ङ्घ ्य