मुख्य खबरे
- कड़े फैसले के 4 बड़े किरदार
ञ्च सोनिया गांधी ने 13 दिसंबर 2012 को गृहमंत्री से अफजल पर अपडेट मांगा था। उन्हें तेजी से मामला निपटाने को कहा था।
- असर
हिंदू आतंकवाद पर घिरी सरकार आक्रामक होगी
ञ्चहिंदू आतंकवाद पर घिरे गृहमंत्री और सरकार 21 फरवरी से शुरू हो रहे बजट - मायने
सरकार सॉफ्ट स्टेट की छवि तोडऩे में सफल होगी
ञ्चतमाम आशंकाओं, धमकियों को नजरअंदाज कर जिस प्रकार फैसला लिया, उससे स - इसके हर पहलू में राजनीति इसलिए ढेर सारे अर्थ
प्र. अचानक यह क्या हुआ?
उ. कुछ भी 'अचानक' नहीं हुआ। हां 'अचानक' लगे, ऐसा सबकुछ किया गया। अ - 2008 में कहा था-यूं तिल-तिल कर मरने से अच्छा है मौत दे दो, लेकिन ये सरकार फांसी भी नहीं दे
चाहता था-आडवाणी प्रधानमंत्री बनें
- आतंक का गुरूर खत्म
भास्कर न्यूजन नेटवर्कत्ननई दिल्ली
आखिरकार अफजल गुरु को फांसी पर लटका दिया गया। ठीक उसी तरह जैसे 80 दिन पहले कसाब - इनपुट - नई दिल्ली से पंकज पांडेय, इंद्र वशिष्ठ, अमित मिश्रा । प्रस्तुति -नेशनल न्यूज अफजल को सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2005 को फांसी की सजा सुनाई थी। 3 अक्टूबर 2006 को दया याचिका लगी। लेकिन कोर्ट के फैसले प
- विशेष अंक
भारत का सबसे बड़ा समाचार पत्र समूह
कोटा क्च रविवार, १० फरवरी २०१३
- पार्लियामेंट टू बारामूला फांसी की अंदरूनी कहानी
कांग्रेस कोर ग्रुप में निर्णायक फैसला
1. कांग्रेस कोर कमेटी बैठक में अफजल पर निर्णायक फैसला हुआ। इसके बाद शिंदे
