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डेडलाइन  यंग एंटरप्रेन्योर > स्टार्टअपसे मल्टीनेशनल कंपनी का मुकाम  एक धार्मिक परिवार में पला-बढ़ा हूं। मेरे दादाजी बनारस में पंडित थे और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में शिक्षक भी। मध्यम वर्गीय परिवार से होने के कारण मुझे ऐसा करियर चुनना था, जो मुझे एक अच्छी नौकरी दिला सके। यही वजह थी कि इतिहास में रुचि होने के बावजूद मैं इस विषय को आगे नहीं पढ़ सका और एमबीए में दाखिला ले लिया। पढ़ाई पूरी करने के बाद फाइनेंशियल सेक्टर में नौकरी करने लगा। एक दिन परिवार के साथ टीवी पर एक कार्यक्रम देखते हुए हमारे बीच कुछ बहस छिड़ गई। मेरी राय जानकर परिवार के सदस्यों, खासकर मेरी पत्नी और मेरे बड़े भाई ने मुझे अपने विचार लिखने के लिए कहा। किताब लिखने के बारे में तो कभी सोचा ही नहीं था, यहां तक कि स्कूल के दिनों में छोटी कहानी भी नहीं लिखी थी, लेकिन अब लग रहा था कि शायद वे सही कह रहे थे। मुझे किताबें पढ़ने का शौक बचपन से ही था और इतिहास की कई किताबें भी मैंने पढ़ी हैं। शायद इन्हीं से प्राप्त ज्ञान और परिवार की धार्मिक पृष्ठभूमि ने मुझे पौराणिक पृष्ठभूमि पर आधारित किताब िलखने के लिए प्रेरित किया। नौकरी के साथ मैंने लिखना शुरू किया और पांच-छह साल तक नौकरी करने, किताब लिखने और परिवार के साथ वक्त बिताने के अलावा मैंने कुछ नहीं किया। मेरी एमबीए की डिग्री और 14 साल का फाइनेंशियल सर्विस का अनुभव मुझे अपनी किताबों के बिजनेस संबंधी काम में काफी काम अाया।  पेज  नौकरियां  करियर   कोच  पढ़ाई के साथ ऑनलाइन आय के  शिखर
 
 
 
 
MATRIMONY
 
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