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स्कॉलरशिप  यंग एंटरप्रेन्योर > बिनाडिग्री के जमाया करोड़ों का बिजनेस  रा बचपन चेन्नई में गुजरा, हालांकि मेरा जन्म केरल में हुआ था। अपने बचपन का एक किस्सा मुझे अक्सर याद जाता है। आठवीं क्लास में मैंने इंग्लिश का एक निबंध लिखा था, जो मेरी टीचर को इतना पसंद आया कि उन्होंने पूरे स्कूल के सामने उसे पढ़कर सुनाया था। उनके इस प्रोत्साहन से उस दिन मुझे अपने भविष्य का आभास हो गया था और शब्दों की ताकत का अहसास भी। पढ़ाई पूरी होने के बाद मैंने 1990 में कॉपीराइटर के रूप में एक एडवरटाइजिंग कंपनी में अपने करियर की शुरुआत की। शब्दों का जादू बुनते-बुनते लेखन मेरा पैशन बन गया। नौकरी के साथ ही मैंने लिखना शुरू किया और फिर 1997 में लघु कहानियों पर अपनी पहली किताब ‘सटायर ऑफ दि सबवे के साथ फुल टाइम लेखक बन गई। राइटिंग एक ऐसी चीज है जो मुझे खुशी देती है और सुकून भी। कहीं कहीं मुझे लगता है कि लेखक के रूप मुझे स्थापित करने में मेरी स्कूली शिक्षा का बड़ा हाथ रहा है। यह बात मुझे बचपन में ही समझ गई थी कि शिक्षा एक बच्चे की कमियों को दूर करके उसकी क्षमताओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, असल जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए जरूरी स्किल्स के विकास में मौजूदा शिक्षा व्यवस्था क्या योगदान दे रही है इसे लेकर मैं बहुत आश्वस्त नहीं हूं।  पेज  नौकरियां  स्टूडेंट कॉर्नर  शिखर  बैंक में 6425 जाॅब के
 
 
 
 
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