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यंग एंटरप्रेन्योर > मूवीटिकट की बिक्री में नया आइडिया  रा जन्म चेन्नई में हुआ। पिता रेलवे में इंजीनियर थे और मां सुशीला गृहिणी होने के साथ शतरंज की शौकीन थीं। करीब छह साल का था जब मैंने शतरंज खेलना शुरू किया। शह और मात का यह खेल मुझे बहुत रोमांचित करता था। मेरी लगन देखकर मेरी मां ने मुझे शतरंज खेलना सिखाया। वे मुझे सिखाने के लिए खूब मेहनत िकया करती थीं। इसी बीच मेरे पिता को रेलवे के एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में फिलीपींस भेजा गया। मैं और मां भी पिताजी के साथ फिलीपींस चले गए। वहां दोपहर में एक टीवी कार्यक्रम आया करता था। उस वक्त मैं स्कूल में रहता था, इसलिए मेरी मां उस कार्यक्रम मंे दिखाए जाने वाले सभी गेम्स और पजल्स को नोट कर लिया करती थीं और शाम को मेरे स्कूल से लौटने के बाद हम मिलकर उनका हल निकालते और जवाब भेजा करते थे। सही जवाब के बदले इनाम के रूप में किताब दी जाती थी और उस दौरान मैंने कई किताबें जीतीं। शतरंज में मेरा हुनर देखकर मेरी मां एक दिन मुझे चेस क्लब ले गईं। मुझे वह जगह इतनी पसंद आई कि मैं वहां नियमित रूप से जाने लगा। वहां किसी मेज के पास खड़ा हो जाता और खिलाड़यों की चालें देखता-समझता रहता। एक दिन क्लब के एक खिलाड़ी ने मुझे अपने साथ खेलने को कहा, मैं उसे हरा तो नहीं पाया, लेकिन मेरी चालों और आत्मविश्वास को देखकर वहां हर कोई प्रभावित हो गया।  स्कॉलरशिप  पेज  नौकरियां  न्यू एवेन्यू  https://www.freelancer.com/   https://www.odesk.com/   http://www.iwriter.com/   http://freelanceindia.com/   http://wsession.com/   http://worknhire.com/   http://www.peopleperhour.com/
 
 
 
 
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