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यंग एंटरप्रेन्योर > दूसरोंको जॉब दिलाने का वेंचर  रा जन्म ऐसे घर में हुआ था जहां कला, संगीत और रंगमंच की पूजा की जाती थी। माता-पिता दोनों इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर थे। वे शास्त्रीय संगीत में भी पारंगत थे। मेरे और मेरी बहन के लिए हमारा घर ही संगीत की पाठशाला थी, जहां हमें संगीत सीखने और समझने का पूरा मौका मिला।   बचपन में ही इलाहाबाद में मुझे प्रसिद्ध साहित्यकारों से मिलने का अवसर मिला। साहित्य और संगीत से परिवार का खास जुड़ाव होने के बावजूद कभी यह नहीं सोचा था कि एक दिन संगीत ही मेरा करियर बन जाएगा। घर पर संगीत और कविता सिखाई जरूर जाती थी, लेकिन कलाकार बनने और मंच पर प्रस्तुति देने का काेई दबाव नहीं था। जब बीए की पढ़ाई पूरी की तो मां को महसूस हुआ कि मेरे भीतर संगीत के प्रति गहरा लगाव है।   मेरी इस रुचि को देखते हुए मां ने सुझाव दिया कि दूसरों की तरह एमए या पीएचडी करने से बेहतर होगा कि मैं संगीत में एक वर्ष का औपचारिक प्रशिक्षण लूं और तभी अपने करियर का कोई फैसला लूं। मां की तरफ से इतनी आजादी मिलने पर मैं कुछ हैरान थी। यह मेरे लिए एक अवसर था। संगीत के क्षेत्र में ही आगे बढ़ना है यह फैसला लेने में एक महीना लगा। पूरी लगन के साथ संगीत की शिक्षा लेने लगी, लेकिन तय नहीं था कि इसे ही अपना करियर बनाऊंगी।  फेलोशिप  पेज  नौकरियां  सफल छात्रा  मल्टी डिसििप्लनरी विषयों की वजह से पसंद किया जाता है आर्ट्स को
 
 
 
 
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