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> तंबाकू और स्मोकिंग।   > शराब का सेवन।   > जरूरत से ज्यादा खाना और जंक फूड।   > चीनी, नमक व वसा का ज्यादा सेवन।   > तनाव लेना।   > सबसे पसंदीदा चीका कम खाएं।  करण सिंघानिया पीजीपी कोर्स के कोऑर्डिनेटर जतिन नागोरी के साथ।  विनोद यादव . मुंबई     सरफराज   खान महज 15 साल के हैं लेकिन उन्होंने क्रिकेट में सफलता और विफलता के दोनों चरम देख लिए हैं। हैरिस शील्ड में सचिन तेंदुलकर का 346 रन का रिकॉर्ड तोडऩे से लेकर उम्र को कम बताने का आरोप तो कभी बीसीसीआई की बैटिंग अकादमी से निकाला जाना और अब दक्षिण अफ्रीकी टीम के खिलाफ धमाकेदार शतक।   सरफराज बताते हैं कि यह कमबैक अगर संभव हुआ तो केवल दो लोगों की वजह से - पिता नौशाद खान जो उसके कोच भी हैं और खेल मनोविज्ञानी मुग्धा बावड़े। 2011 में जब उसने सचिन का रिकॉर्ड तोड़ा तो वह 11 साल का था। लेकिन महाराष्ट्र क्रिकेट अकादमी द्वारा कराए बोन डेंसिटी टेस्ट में उसकी उम्र 13 साल निकली। उम्र छिपाने का आरोप लगा। पिता ने दोबारा टेस्ट कराया। उम्र 11 साल आई। अकादमी मानने को तैयार नहीं हुई। बहुत मिन्नतों के बाद अकादमी ने फिर टेस्ट कराए। उम्र स्कूल सर्टिफिकेट वाली यानी 11 साल पाई गई। सरफराज दोषमुक्त। लेकिन इस सबसे से वह इतने डिप्रेशन में चला गया कि ठीक से खाना नहीं खाता था। प्रैक्टिस छोड़ दी। बातें करना अच्छा नहीं लगता था। हर वक्त रोते रहना। नौशाद कहते हैं, हम समझ ही नहीं पा रहे थे कि उसका हौसला कैसे बढ़ाएं। ऐसे में खेल मनोविज्ञानी बावड़े ने उसका जिम्मा उठाया। चार महीनों तक काउंसिलिंग चली। उसने खेल में फिर मन लगाया और बीसीसीआई की बैटिंग अकादमी मेंं दाखिला लिया। लेकिन पिछले साल अनुशासनहीनता के मामले में अकादमी से निकाल बाहर किया गया। आरोप लगे कि कोच की बात नहीं सुनता। मना करने के बावजूद हुक शॉट लगाने बंद नहीं किए। एक बार काउंसिलिंग का दौर चला।   शेष पेज 18 पर       1990 में राष्ट्रीय स्वीमिंग चैपियन रही बावड़े ने भास्कर को बताया - मुझे मालूम है एक खिलाड़ी पर किस तरह के दबाव होते हैं।   सरफराज उम्मीदों के बोझ तले दबा था। उसके पिता अनुशासनप्रिय व सख्त मिजाज के हैं। अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव डालते थे। इससे उस पर मानसिक प्रेशर पड़ रहा था। इसी वजह से खेल के साथ-साथ व्यवहार में उग्रता आग रही थी। मैंने उसे दूसरे प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को हुई इस तरह की परेशानी का उदाहरण दिया। बताया राष्ट्रीय स्तर की तैराक तेजस्वीता भारद्वाज का प्रदर्शन काउंसिलिंग के बाद कैसे बेहतर हो गया। मैंने पहले तो सरफराज का आत्मविश्वास बढ़ाया और बाद में उसे अपना स्वाभाविक खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। जिसके बाद उस की सब प्रॉब्लम धीरे-धीरे दूर हो गईं।   पिता नौशाद कहते हैें कि मेहनत नहीं करेगा तो परफार्म कैसे करेगा। वह प्रतिदिन छह घंटे अभ्यास करता है। पिछले हफ्ते जब सरफराज ने 66 गेंदों में 101 रन बनाए तो नौशाद ने कहा - तुम पर मैच जिताने की जिम्मेदारी थी। आउट क्यों हो गए? हालांकि जब सरफराज आउट हुआ तो उस समय इंडिया अंडर 19 की टीम को जीत के लिए सिर्फ 19 रन बनाने थे और 14 ओवर बाकी थे। नौशाद कहते हैं कि वे उसे मैच कंडीशंस में खिलाते हैं। हर बार आउट होने पर उसे पैड बांध हुए दौड़कर पूरे मैदान का चक्कर लगाना होता है।   फॉर्म में लौटने के लिए सरफराज मुग्धा का शुक्रिया अदा करता है। उन्होंने न सिर्फ खेल के प्रति बल्कि जिंदगी के प्रति भी मेरा नजरिया बदल दिया। नौशाद भी मानते हैं - अब वह फालतू चीजों पर वक्त जाया नहीं करता। उसका पूरा ध्यान खेल और फिटनेस पर है। लेकिन मुग्धा कहती हैं - मैं उसे खेल के साथ पढ़ाई पर ध्यान देने को कह रही हूं। आखिर आप जिंदगी भर तो खेलते नहीं रह सकते। पढ़ेगा नहीं तो रिटायरमेंट के बाद क्या करेगा?      २०१४ : प्रोजेक्ट के डाटा बैंक में होंगे  राजस्थान का इंजीनियर झारखंड में उगा रहा बेबी-कॉर्न
 
 
 
 
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