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जगह-जगह फुटेज मिल रहे, पुलिस को नहीं मिल रही बोलेरो  बिजली के पोल काट हटाए, टुकड़े छोड़े  शिकायत पर रोकी अवैध ट्यूबवेल खुदाई, फिर शुरू हुई तो अफसरों ने आकर बंद करवाया  एटीएम ब्लॉक बता कर ठगने जा रहे कॉलर से युवक ने करवा लिया नेट रिचार्ज  डीबी स्टार }जोधपुर   शहर के पर्यटक स्थल गुलाब सागर के किनारे खाली पड़े जमीन के जिस बड़े टुकड़े पर नगर निगम कैफेटेरिया बनवा रहा है, उस जमीन को 61 साल पहले ही सार्वजनिक हित में खाली रखने के आदेश हो चुके हैं। बावजूद इसके निगम के जिम्मेदारों ने महज 6500 रुपए मासिक किराये पर इस जमीन का ठेका दे दिया। कैफेटेरिया के खिलाफ में खड़े हुए लोगों ने जब 1955 में अतिरिक्त संभागीय आयुक्त के आदेश की कॉपी दिखाई तो निगम के आयुक्त ने मौके पर पहुंच ठेकेदार को काम नहीं करने के निर्देश दिए। इधर, निगम पशोपेश में है कि अब वह इस जमीन का क्या करे, उधर ठेकेदार ने आयुक्त के जाते ही फिर से कैफेटेरिया के लिए निर्माण शुरू कर दिया। लोग विरोध में हैं तो ठेकेदार नियमों का हवाला दे कह रहा है कि निगम ने ठेका दिया है, वह काम क्यों बंद करे।   दरअसल निगम की ओर से गुलाब सागर के पास कैफेटेरिया, पार्किंग और बोटिंग के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थी। निगम ने औपचारिक शर्तें पूरी करने पर एक फर्म को इन तीनों सुविधा के लिए 6500 रुपए मासिक किराये पर जमीन देने का निर्णय ले लिया। ठेका फर्म ने उम्मेद स्कूल के सामने खुली पड़ी सार्वजनिक जमीन 96 गुणा 44 वर्गफीट में से करीब आधी जमीन को लोहे की जाली लगाकर अपने कब्जे में ले लिया। इस जमीन पर कैफेटेरिया बनाने के लिए निर्माण भी शुरू कर दिया। लोगों ने इसका विरोध किया। ठेकेदार काम पर अड़ा रहा। उसका तर्क है कि निगम ने उसे यह जमीन ठेके पर दी है। लोगों की शिकायत है कि निगम इस सार्वजनिक जमीन को उपयोग करने के लिए किसी को भी ठेके पर नहीं दे सकता। विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। निगम उलझन में है कि वह अब इस ठेके को निरस्त नहीं करे तो 61 साल पहले हुए फैसले की पालना कैसे करे।  जोधपुर एसीबी पता लगाएगी एसई कहां से लाए थे 6 लाख  ...क्योंकि पर्सनल स्पेस भी जरूरी है ...   पेज-3
 
 
 
 
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