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    बुजुर्गों का दर्द देखा तो बनाया गांव डिजिटल   सरपंचगगनजोत संधू ने बताया कि उनका गांव हलके का सबसे बड़ा गांव हैं। गांव से 100 से अधिक युवा विदेशों में रोजगार के लिए गए हैं। कई घर तो ऐसे हैं जिनका इकलौता बेटा भी रोजगार की तलाश में विदेश चला गया। बच्चों से मिलने की तड़प में कई बार इनका दर्द आंसू बनकर छलक जाता था। तब उन्होंने गांव को वाई-फाई युक्त बनाने की सोची। ये बुजुर्ग वीडियो का-लिंग के जरिए अपने बच्चों से आमने-सामने बात करते हैं। कई युवा तो ऐसे हैं जिन्होंने विदेश में ही शादी कर ली या फिर पत्नी को लेकर विदेश चले गए और विदेश में ही उनके घर संतान जन्मी। जिसकी सूरत दादा-दादी ने वीडियो कॉल के जरिए इंटरनेट पर ही देखी। बुजुर्ग मनजीत सिंह बताते हैं कि उनका बेटा न्यूजीलैंड में है और वे हर रोज उससे आमने-सामने बात करते हैं।  साढ़े तीन लाख रुपए ग्रामीणों ने जुटाकर दिए.. पुलिसकी जेक लगभग 300 मोबाइल का लोड उठा लेता है। बीएसएनएल और ट्राई मैक्स मिलकर इस सुविधा को लांच किया है। ग्राम पंचायत ने परियोजना के लिए तीन लाख रुपए की राशि मंजूर की। विधायक जसविंद्र संधू ने भी अपने कोष से दो लाख रुपए का योगदान दिया। जबकि साढ़े तीन लाख रुपए ग्रामीणों ने जुटाकर दिए।  गुमथलागढू प्रदेश के लोगों के लिए बना मिसाल, 100 से ज्यादा लोग रहते हैं विदेश  बुजुर्ग बोले, पहली बार नेट पर देखा विदेश में जन्मे पोते-पोतियों का मुंह  गांव हुआ वाईफाई, बुजुर्गों में सोशल मीडिया का क्रेज, दोस्तों के साथ खूब करते हैं चेट  आज छा सकते हैं बादल, बंूदाबांदी के आसार  आगे का मौसम...  अब जिला अस्पताल में मिलेगी हीमोफीलिया की दवा  शहीदों के सम्मान में बनवाया संग्रहालय  केयू की छात्रा ने तैयार किए इको फ्रेंडली कंपाउंड  महिलाओं के हुनर को सामने लाने को बनाया तीन सहेलियों ने चैनल  सरबसांझी गुरबाणी  शहर में की गई वाल पेंटिंग सजावटी दीवारों पर पोस्टर लगाने पर कार्रवाई  मौसम  केयू आउटसोर्सिंग कर्मियों को मिलें सुविधाएं  व्यवसायिक मार्गदर्शन सप्ताह 16 से 20 तक  जांगड़ा समाज ने बैठक कर बनाई अस्थाई कमेटी  मैक में राज्य स्तरीय कार्यशाला आज से  खबरें फटाफट