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Change Magazine
 
समलैंगिकों को अपनी आत्मगरिमा के साथ जीवन जीने का मौका मिले तो भला कोई क्यों किसी को धोखे में रखकर उससे शादी करेगा। क्या इस एक तबके के मानवाधिकार को सुरक्षित कर हम अपने और प्रियजनों के मानवाधिकार को भी सुरक्षित नहीं रखेंगे? क्या हम कुछ अविवेकी और अवैज्ञािनक लोगों द्वारा लैंगिक हिंसा के प्रचार से एक दयाहीन और आमनवीय समाज नहीं गढ़ रहे?
 
 
 
 
MATRIMONY
 
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