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मुठभेड़ में शामिल एएसआई भुपेंद्र सिंह ने बताया कि ‘आतंकियों की गोलियां एसपी बलजीत सिंह के पास से निकल रही थीं। वे थाने की छत पर टंकी के पीछे मोर्चा संभाले हुए थे। मैंने उनसे संभलने को कहा तो बोले- आप मेरी चिंता मत करो, आगे बढ़ कर लड़ो... मैं इनको खदेड़ के ही दम लूंगा। तभी एक गोली उनके सिर में लग गई। बलजीतसिंह के पिता अच्छर सिंह पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर थे। 1984 में आतंकियों ने उनकी भी हत्या कर दी थी।
 
 
 
 
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