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मुख्य खबरे

 
कौन है जिम्मेदार     शहर के सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति के जिम्मेदार कोई और नहीं, खुद स्कूल प्रबंधन हैं। विभाग से हर वर्ष प्रत्येक स्कूल को लाखों रुपए मेंटेनेंस ग्रांट दी जाती है। ग्रांट के तौर पर मिलने वाला ये पैसा आखिर स्कूल प्रबंधन कहां खर्च करता है। इसका जवाब तो स्कूल प्रबंधकों के पास भी नहीं है। किसी स्कूल की बिल्डिंग खस्ता है तो कहीं मैदानों की बुरी हालत है। असलियत तो ये है कि लाखों रुपए से स्कूलों की मेंटेनेंस ही नहीं हो रही है।     एक साल में स्कूलों को मिलने वाली ग्रांट     रिपेयर एंड मेंटेनेंस ग्रांट :   सर्वशिक्षा अभियान की ओर से स्कूलों की मेंटेनेंस के लिए प्राइमरी और मिडिल स्कूल को 7500 रुपए सालाना दिए जाते हैं।     स्कूल इम्प्रूवमेंट ग्रांट:   सर्वशिक्षा अभियान की ओर से प्राइमरी स्कूलों को 5000 रुपए सालाना मिलते हैं और मिडिल स्कूलों को 7000 रुपए सालाना मिलते हैं।     बीआरसी कंटिन्जेंसी:   ब्लॉक रिसोर्स सेंटर के लिए हर वर्ष 50000 रुपए।     राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत मिलने वाली ग्रांट:   राष्ट्रीय माध्यमिक शि्षा अभियान के तहत सरकारी हाई स्कूल और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को सालाना 25000 हजार रुपए ग्रांट दी जाती है, जिससे स्कूल प्रबंधन को स्कूल के मेंटेनेंस के काम करवाने होते हैं।  पंचकूला  शनिवार, 29 दिसंबर 20१२  कागजों में मेंटेनेंस पूरी, असल में अधूरी