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    ‘50 हजार कर्मचारी, 3 हजार ब्रांच में 11 बजे तक काम कर रहे हैं, गड़बड़ी दो ब्रांच में  चीन में बच्चों के लिए बनाया स्मॉग फ्री स्टेडियम  बांग्लादेश में 46 साल बाद अब रिलीज़ होंगी भारतीय फिल्में  अमेरिका से शेरनी का दूध मंगाया, शावक को बच्चों के इंक्यूबेटर पर रखा, दिन-रात जागकर देखभाल की  भास्कर न्यूज नेटवर्क | चेन्नई   जयाजैसे-जैसे उठती गईं, शशिकला पनपती गईं। जया के अपने छूटते गए और शशिकला के जुड़ते गए। जया से परिचय, उनकी प्रतिष्ठा और प्रभाव तीनों ने उनका जीवन बदल दिया।   जब शशिकला1989 में जया के घर शिफ्ट हुईं तो साथ 40 नौकरों को लेकर आईं। ये सभी मनारगुड़ी से थे, जहां शशिकला पैदा हुई थीं। एक किसान के घर में। जया के पोएस गार्डन हाउस में घरेलू नौकर, रसोइया, सिक्यूरिटी गार्ड, ड्राइवर और यहां तक मैसेंजर तक मनारगुड़ी का था। विरोधी तो इन्हें कई बार मनारगुड़ी का माफिया बोलती थी। ये मामूली बात नहीं है कि एक वीडियो पार्लर चलाने वाली महिला पूरे राज्य की राजनीति नियंत्रित करती हो। हां, ऐसा ही तो था। शशिकला और जया की बढ़ती नजदीकियों के बाद तो कई मंत्री और अफसर महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में शशिकला से ही पूछ लेते थे। यानी अम्मा नहीं तो चिनम्मा ही काफी हैं। शशिकला को अब चिनम्मा ही तो कहते हैं। यानी मौसी।   शशिकला ने जयललिता से संपर्क बढ़ाने के लिए कम पापड़ नहीं बेेले। वो वीडियो पार्लर चलाती थीं। फिर खासतौर पर उन शादियों को कवर करने जाने लगीं, जिसमें जयललिता शामिल होती थीं। शशिकला के पति नटराजन कडलोर की कलेक्टर वीएस चंद्रलेखा के साथ काम करते थे। चंद्रलेखा तमिलनाडु के तत्कालीन सीएम एमजीआर की करीबी थीं। एमजीआर जया के करीबी थे। बस इसी कारण चंद्रलेखा ने शशिकला को जया से मिलवा दिया। 1983 में शशिकला ने जया की महिला विंग की एक बड़ी रैली को शूट किया और जया के करीब गईं। जया कहती थीं ‘उडनपिरावा सगोधारी यानी हम बहने हैं बस खून का रिश्ता नहीं है। शशिकला का परिवार गरीब था, लेकिन वेे प्रभावशाली कल्लार परिवार से ताल्लुक रखती थीं। माना जाता है जब से वो जया के करीब आई, कल्लार समुदाय का प्रभाव और मौजूदगी सरकार में हर स्तर पर बढ़ी है।   शेष| पेज 7 पर   80के दशक में जब जयललिता और शशिकला की दोस्ती परवान चढ़ रही थी, तब शशिकला का परिवार अपने गुजारे के लिए संघर्ष के दौर से गुजर रहा था। मन्नारगुड़ी के लोग कहते हैं- तब शशिकला का भाई धीवाहरन बेरोजगार घूमा करता था। एक बार तो वह छोटी-मोटी नौकरी के सिलसिले में सिंगापुर भी गया था, पर जल्द ही लौट आया। आज वही धीवाहरन मन्नारगुड़ी में डॉ वी धीवाहरन के नाम से जाने जाते हैं। लोग उन्हें ‘बॉस कहते हैं। कावेरी डेल्टा क्षेत्र यानी तंजावुर और पास के शहरों में वह सबसे प्रभावशाली हस्ती है। धीवाहरन मन्नारगुड़ी कस्बे के पास ही ऑल गर्ल्स सेंगमला थयार एजुकेशनल ट्रस्ट वुमंस कॉलेज चलाते हैं। धीवाहरन से ‘बॉस डॉ. वी धीवाहरन बनने की शुरुआत करीब-करीब तभी की है, जब ‘मन्नारगुड़ी माफिया पनपना शुरू हुआ था। कहा जाता है कि शशिकला का लंबा-चौड़ा परिवार ही असल में तमिलनाडु को चलाता है। धीवाहरन तो इस मन्नारगुड़ी परिवार का बहुत ही छोटा हिस्सा है। समय के साथ-साथ इस परिवार ने तमिलनाडु के बाहर भी अपनी जड़ें फैला लीं। हर कोई मानता है कि सरकार के हर स्तर पर इस परिवार के लोग बैठे हैं। रहस्य के परदे में रहकर भी इन लोगों ने पूरे राज्य पर लोहे सी पकड़ बना रखी है। अफसर तक कहते हैं- ये बहुत चालाक हैं। हर चीज को मैनेज करना जानते हैं। इनके लोग हर कहीं हैं, जया टीवी से लेकर मंत्रालयों तक। पुलिस और ब्यूरोक्रेसी में ऊपर से लेकर नीचे तक इनकी ‘कठपुतलियां हैं। 2012 में शशिकला के कमजोर होने पर मन्नारगुड़ी का यह सिस्टम भी कमजोर पड़ा, लेकिन उनके लौटते ही ये लोग फिर मजबूत हो गए। लोग कहते हैं-ये कुछ भी नहीं छोड़ते, यहां तक कि बस स्टैंडों पर साइकिल स्टैंड का ठेका तक इनके पास है। अंदरूनी लोग बताते हैं- शशिकला के परिवार के लोग हर अहम जगहों पर बिठाए हुए हैं। इनकी आंख और कान हमेशा ब्यूरोक्रेसी और मंत्रालयों पर लगी रहती है। पुलिस अफसर बताते हैं कि थेवर समुदाय से जुड़ा एक सीनियर आईपीएस तक लंबे समय तक इन लोगों के साथ काम करता रहा है। चेन्नई से लेकर दिल्ली तक डेपुटेशन पर बैठे ‘इनके लोग इन तक खबरें पहुंचाते हैं। कहते हैं कि शशिकला 90 के दशक में अक्सर मद्रास से महाबलिपुरम सड़क के रास्ते से जाती थीं। बाकी लोगों की तरह इसलिए नहीं कि वे प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकें, बल्कि इसलिए कि उन्हें पता चल सके कि अब किस भूमि को अधिग्रहित किया जा सकता है। बतातेे हैं कि लोग कहते थे कि अगर कोई बड़ा कंस्ट्रक्शन कर रहे हो तो उसे इस तरह करो कि वह बुहत छोटा लगे। वरना हाथ से जा सकता है। वैसे शशिकला ने जया के करीब आने के लिए कई कुर्बानियां भी दी हैं। 1996 में ईडी ने मनी लॉन्डरिंग केस में शशिकला को गिरफ्तार किया था। वो 10 माह जेल में रही थीं। उस समय राज्य में डीएमके की सरकार थी और कहा जाता था कि शशिकला पर जया को फंसाने के लिए खूब दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन शशिकला ने जया को धोखा नहीं दिया। इसके बाद जया और शशिकला की दोस्ती और गहरी हो गई।