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    “गोलमाल पर अब सिर्फ रोहित का मालिकाना हक   पेज-4 सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी राज्यों में 30 अप्रैल 2012 के बाद शो रूम से निकली गाड़ियां एचएचआरपी जरूर लगाएं। इसके अलावा 15 जून 2012 से पुरानी गाड़ियों में भी एचएसआरपी लगाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश था। बिहार ने 15 फरवरी 2012 को एचएसआरपी लगाने के लिए दिल्ली की कंपनी और परिवहन विभाग के बीच समझौता किया था, लेकिन काम शुरू होने के पहले ही यह समझौता खत्म हो गया। इसके बाद यह काम दूसरी कंपनी को दिया गया। काम शुरू होने के पहले ही यह करार भी खत्म हो गया। इसके बाद यह काम दिल्ली की कंपनी लिंक प्वाइंट को सौंपा गया। कंपनी ने जून 2012 में काम शुरू किया। कांट्रैक्ट था दो साल में काम पूरा करने का। कंपनी ने सभी जगह दफ्तर खोले और मैनुअल पर्ची काटना शुरू किया गया। पर्चियों का अंबार लग गया और उस गति से प्लेट नहीं बनाए लगाए जा सके। इसी आधार पर 16 जनवरी 2013 को कंपनी को सस्पेंड कर दिया गया। करीब छह महीने तक काम बंद रहने के बाद दोबारा उसी को काम सौंपा गया। बीच में पटना और मुजफ्फरपुर तक सीमित रखा गया। फिर सभी जिलों के लिए निर्देश आया, मगर लोग अब भी इसे जरूरी नहीं समझ रहे।  दो हफ्ते में हटाना था कब्जा, दो माह में नहीं हटा  डस्टबिन के बावजूद सड़क पर कूड़ा फेंका जा रहा, बढ़ रही है परेशानी