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रामेश्वरम से उपमितावाजपेयी   मदुरैसे कलाम साहब का गांव 166 किमी दूर है। रास्ते का कोई गांव, कोई कस्बा, कोई मोहल्ला नहीं जो उनके पोस्टर से ढंका हो। हाईवे के दुकानदार तक ने उनके कैलेंडर चिपका रखे हैं। चाहे रामेश्वरम जाने वाली गाड़ी हो या वहां से आने वाली, सब पर कलाम का फोटो। समुद्र पर बना देश का इकलौता रेलवे ट्रैक पामबन ब्रिज पार करते रात के 12 बज चुके थे। पर लोग हर कहीं मौजूद। सभी चौराहों पर कलाम की फोटो और उसके सामने जलती मोमबत्तियां। तीन दिन से रामेश्वरम सोया नहीं है।   बुधवार को कलाम का शव जब रामेश्वरम पहुंचा तो साथ में 16 और लोग भी एयरफोर्स के विमान में सवार थे। इनमें उनका खाना बनाने वाले से लेकर एडवाइजर्स भी शामिल थे। अपने साहब की हर छोटी-बड़ी यादें उनके जेहन में दस्तक दे रही थीं और आंखें रह-रहकर नम हो रही थीं। कलाम को सबसे पहले उनके घर ले जाया गया। वहां कलाम के बड़े भाई मोहम्मद मारयेकयर इंतजार कर रहे थे। वैसे ही जैसे हर शाम वे अपने 17 साल छोटे भाई के फोन का इंतजार किया करते थे। आज जब भाई का शव सामने आया तो एकटक उसे निहारते रहे। फिर कांच के ऊपर से ही भाई को सहलाने लगे। थोड़ी देर ठिठके रहे, फिर पास रखे सफेद फूल उठाए और कांपते हाथों से कांच पर सीधी लाइन में जमाने लगे। नीचे उनका छोटा भाई सो जो रहा था। घर से दो कदम दूर जिस मस्जिद में कलाम कभी अपने पिता के साथ पांच वक्त की नमाज पढ़ते थे, आज उनके लिए यहां जनाजे की नमाज पढ़ी गई। भीतर कुरान की आयतें और बाहर भारत माता की जय के नारे लग रहे थे। यहां इमाम भी मौजूद थे और पंडित भी। आखिर कलाम भी तो गीता और कुरान साथ पढ़ते थे। उनको सुपुर्द-ए-खाक करने में कुछ ही घंटे बाकी थे जब आम लोगों के लिए अंतिम दर्शन रोक दिए गए। पर लोगों के आने का सिलसिला नहीं रुका। गुरुवार सुबह चार बजे तक कलाम के घर से चार किमी दूर तक लोग खड़े थे। लेकिन वे कलाम से मिल नहीं सके। कलाम ने अपने घर को ‘जीवन गैलरी नाम दिया था। यहीं से उन्होंने अंतिम यात्रा शुरू की। घर के मुहाने पर परिवार की एक दुकान है। उसका नाम है ‘एपीजे कलाम सी शैल्स शॉप। इसमें समुद्री सीपियों से बनी चीजें बेची जाती हैं। इस दुकान तक आने वाली सभी गलियों में लोग जमा थे। छतें, खिड़कियां और चारदिवारियांे तक पर तिल रखने की जगह नहीं थी। आधी भीड़ तो एक दूसरे के पैरों पर पैर रखे खड़ी थीं। सब अपने छोटे से गांव के बड़े कलाम पर गर्व कर रहे थे। दस किमी के रास्ते पर भीड़ से ओवरलोड सड़कों ने उन्हें विदाई दी। और मैदान पर पीएम से लेकर वीवीआईपी ने उनके जाने से पहले आखिरी सैल्यूट किया।  आप पढ़ रहे हैं देश का सबसे विश्वसनीय और नंबर 1 अखबार
 
 
 
 
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