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आचार्यश्री िवद्यासागर महाराज का सागर में मंगल प्रवेश   आज भोपाल, सीहोर समेत कई जगह होगी बारिश   तानाशाह जैसे हैं फेसबुक सीईओ जकरबर्ग स्टाफ से टेबलें साफ कराते हैं, गालियां देते हैं   ढाका के रेस्त्रां में घुसे आतंकी विदेशियों समेत 30 बंधक   प्रवीण कौशिक | फरीदाबाद |राजेंद्र बतरा| श्रीगंगानगर (साथ में दिव्य भास्कर नेटवर्क)   दिल्ली से सटी नवीन नगर सोसायटी में 1835 लोग 17 साल से अपने प्लॉट के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां उनकी जमीनों पर भूमाफिया का कब्जा है। जमीन का हक पाने के लिए एक युवक यशपाल तो पिछले 814 दिन से मिनी सचिवालय के सामने धरने पर है।   राजस्थान के श्रीगंगानगर में जमीन के लिए भाई-बहनों, जेठानी-देवरानी और सास-बहू के बीच 2000 से ज्यादा केस चल रहे हैं। अहमदाबाद के ओगणज गांव में आधी सदी से तीन पीढ़ियां 12 हजार वर्गफीट जमीन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है।यह सिर्फ तीन मामले नहीं है, जमीनों से जुड़ा सबसे बड़ा सच है। देश में सबसे ज्यादा मुकदमे जमीनों के ही हैं, सबसे पुराना मुकदमा भी जमीन का है। ‘दक्ष सर्वे के मुताबिक-देश में लंबित 73 लाख सिविल मुकदमों में 66% जमीन से जुड़े हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर जमीन प्रक्रिया और रिकॉर्ड सुधर जाए तो अदालतों से 60% तक यानी करीब 30 लाख केस खत्म हो सकते हैं। जमीनी रिकॉर्ड सही करने के लिए केंद्र पिछले 28 साल में तीन बार प्रोग्राम लॉन्च कर चुका है। लेकिन कई राज्य सरकारों ने तो फंड की आधी राशि भी इस्तेमाल नहीं की।   52 साल , तीन पीढ़ियां, और एक रुका हुआ फैसला पेज | 9     पेज एक का शेष     देश में सबसे पहले 1988 में जमीनी रिकॉर्ड को कंप्यूटराइज करने का काम शुरू हुआ था। 2008 में सरकार ने डिजीटाइजेशन का काम शुरू किया, राज्यों को 2017 तक यह काम खत्म करना था। काम की रफ्तार धीमी थी। बजट-2016 में सरकार को प्रोग्राम रीलॉन्च करना पड़ा।   वहीं, सुप्रीम कोर्ट में वकील मुकेश आनंद ने बताया- देश में जमीन संबंधी विवादों में सबसे ज्यादा 30 से 35 फीसदी तक मामले अवैध कब्जे को लेकर होते हैं। इनमें किराएदार-मालिक विवाद भी शामिल है। कोर्ट से स्टे मिलने के बाद केस लंबा चलता है प्रॉपर्टी की कीमत भी कम हो जाती है। प्रक्रिया सरल हो जाए तो कम से कम 50 फीसदी मामले कम हो जाएंगे क्योंकि ज्यादातर मामलों में तो सरकार ही पार्टी है। सरकारी प्रक्रिया धीमी होने के कारण केस वर्षों चलते हैं।   52 साल , तीन पीढ़ियां, और एक रुका हुआ फैसला   अहमदाबाद के समीप ओगणज गांव के जयंतीभाई पटेल को विरासत में 12000 वर्गमीटर जमीन मिली थी, लेकिन विरासत में उन्हें कानूनी जंग भी मिली। जयंतीभाई के पिता सुरेशभाई ने सबसे पहले 1964 में इस जमीन के लिए दावा किया था। सुरेशभाई की मृत्यु के बाद वादी के रूप में जयंतीभाई जुड़े, केस आगे बढ़ाया। अब उनके भी बेटे यह केस लड़ रहे हैं। वादी-प्रतिवादियों की संख्या अब तक आठ तक पहुंच गई है। सभी पक्षकारों की ओर से 12 वकील बदले जा चुके हैं। इस केस की अगली सुनवाई 29 जुलाई तय की गई है।   जब तक जमीन नहीं मिलेगी घर नहीं जाऊंगा   फरीदाबाद. अपने प्लॉट से कब्जा हटवाने के लिए दिन-रात धरने पर बैठने वाले यशपाल के अनुसार वे 7 अप्रैल 2014 को परिवार छोड़ धरने पर आए थे। इसके बाद वह घर नहीं गए। कभी-कभी फोन पर ही परिवार की सलामती ले लेते हैं। यशपाल के अनुसार वह कपड़े के तंबू के नीचे दिन-रात सर्दी, गर्मी बरसात के मौसम में रहते हैं। 46 डिग्री तापमान की गर्मी हो या 4 डिग्री की सर्दी, यशपाल यहीं रहते हैं। कहते हैं- जब तक मेरी सोसायटी से कब्जा नहीं हट जाता,घर नहीं जाऊंगा।   यहां भाइयों के खिलाफ कोर्ट में बहनें   करणपुर (श्रीगंगानगर) की प्रभजोतकौर ने 5 साल पहले अपने भाई दिलप्रीतसिंह के खिलाफ कोर्ट में केस किया। आरोप लगाया कि वह शादी के बाद कनाडा शिफ्ट हो गई और उसके भाई ने पिता से मिली जमीन और पैतृक संपत्ति हड़पते हुए अपने नाम कर ली। मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। करणपुर के ही 28 एच में निर्मलजीतकौर व उसकी पुत्रवधू राजविंद्रकौर में 54 बीघा जमीन काे लेकर विवाद चल रहा है। श्रीगंगानगर में प्रभजोत-दिलप्रीतसिंह तथा निर्मलजीत-राजविंद्रकौर का यह इकलौता केस नहीं है, जिलेभर की कोर्ट में ऐसे 2000 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। इनमें कुछ केस बहनों ने भाइयों पर किए हैं ताे कुछ में जेठानी ने देवरानी पर केस किया है तो कुछ में पार्टी सास-बहू हैं। श्रीगंगानगर में इन केसों की तादाद ज्यादा होने की बड़ी वजह यह है कि यहां जमीनें उपजाऊ हैं। जो जमीन नहर के ही आसपास है। कीमत 20 से 30 लाख प्रति बीघा है। यानी एक मुरब्बा 25 बीघा जमीन भी हुई तो उसकी कीमत 5 से 7.50 करोड़ रुपए होती है। इसलिए कोई बहन, कोई भाई अपने हिस्से की जमीन किसी को नहीं देना चाहता।  ड्राइवर श्यामवर की गवाही- इंद्राणी मैडम कार में ही शीना पर चढ़कर बैठ गईं और मार डाला, अगले दिन लाश को लिपस्टिक लगाई और जंगल में ले जाकर जला दिया   दिल्ली में तय नाम मप्र में बदले, संघ नाराज   वायुसेना में शामिल हुआ तेजस  गैर सब्सिडी सिलेंडर 13 रु. सस्ता सब्सिडी सिलेंडर 1.98 रु. महंगा  शास्त्री ने आईसीसी क्रिकेट समिति से दिया इस्तीफा  जनरल टिकट 5 मिनट और रिजर्वेशन 15 मिनट में मिलेगा  हाथी को नौवीं बार मिला नया पैर   सेल्फ डिक्लेरेशन से मिल जाएगा अपाॅइंटमेंट लेटर  अमरनाथ यात्रा शुरू, जम्मू से पहला जत्था रवाना  सेंसेक्स + 145.19 27,144.91   यूरो - 0.30 74.89   डॉलर -0.20 67.32   सोना + 200.00 30,100   चांदी + 1700.00 43,500
 
 
 
 
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