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शास्त्री ने आईसीसी क्रिकेट समिति से दिया इस्तीफा  जनरल टिकट 5 मिनट और रिजर्वेशन 15 मिनट में मिलेगा  वायुसेना में शामिल हुआ तेजस   अमरनाथ यात्रा शुरू, जम्मू से पहला जत्था रवाना  ढाका के रेस्त्रां में आतंकी हमला चार की मौत, 30 से ज्यादा बंधक   ड्राइवर श्यामवर की गवाही- इंद्राणी मैडम कार में ही शीना पर चढ़कर बैठ गईं और मार डाला, अगले दिन लाश को लिपस्टिक लगाई और जंगल में ले जाकर जला दिया   दिल्ली में तय नाम मप्र में बदले   तानाशाह जैसे हैं फेसबुक सीईओ जकरबर्ग स्टाफ से टेबलें साफ कराते हैं, गालियां देते हैं   प्रवीण कौशिक | फरीदाबाद |राजेंद्र बतरा| श्रीगंगानगर (साथ में दिव्य भास्कर नेटवर्क)   दिल्ली से सटी नवीन नगर सोसायटी में 1835 लोग 17 साल से अपने प्लॉट के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां उनकी जमीनों पर भूमाफिया का कब्जा है। जमीन का हक पाने के लिए एक युवक यशपाल तो पिछले 814 दिन से मिनी सचिवालय के सामने धरने पर है।   राजस्थान के श्रीगंगानगर में जमीन के लिए भाई-बहनों, जेठानी-देवरानी और सास-बहू के बीच 2000 से ज्यादा केस चल रहे हैं। अहमदाबाद के ओगणज गांव में आधी सदी से तीन पीढ़ियां 12 हजार वर्गफीट जमीन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है।   यह सिर्फ तीन मामले नहीं है, जमीनों से जुड़ा सबसे बड़ा सच है। देश में सबसे ज्यादा मुकदमे जमीनों के ही हैं, सबसे पुराना मुकदमा भी जमीन का है। ‘दक्ष सर्वे के मुताबिक-देश में लंबित 73 लाख सिविल मुकदमों में 66% जमीन से जुड़े हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर जमीन प्रक्रिया और रिकॉर्ड सुधर जाए तो अदालतों से 60% तक यानी करीब 30 लाख केस खत्म हो सकते हैं। जमीनी रिकॉर्ड सही करने के लिए केंद्र पिछले 28 साल में तीन बार प्रोग्राम लॉन्च कर चुका है। लेकिन कई राज्य सरकारों ने तो फंड की आधी राशि भी इस्तेमाल नहीं की।   52 साल , तीन पीढ़ियां, और एक रुका हुआ फैसला पेज | 13  समान नागरिक संहिता पर केंद्र सरकार ने मांगी रिपोर्ट   फ्लैट में देरी पर 5 करोड़ जुर्माना, नहीं दिया तो निदेशक जाएंगे जेल   सेंसेक्स + 145.19 27,144.91   यूरो - 0.30 74.89   डॉलर -0.20 67.32   सोना + 200.00 30,000   चांदी + 600.00 42,000
 
 
 
 
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