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चार ट्रेनें निरस्त होने से लोगों की मुसीबत  विकास कार्यों में नहीं अा पा रही है गति  इनका कहना है  धूल से होती है खासी दिक्कत   रेकलगने के बाद ट्रकों की रेलमपेल होती है। इसके चलते बहुत धूल उड़ती है। जिला अस्पताल के वार्डों तक धूल पहुंच जाती है। वहीं डायलेसिस सेंटर में धूल की वजह से दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा मानव सेवा न्यास में धूल की वजह से परेशानी होती है।  रोजाना २५० ट्रकों के लगते हैं फेरे   रेलवेकी रेक लगने पर सुबह से जब ट्रकों की आवाजाही शुरू होती है तो वह रात चलती रहती है। औसत ट्रकों के २५० फेरे शहर में प्रवेश करते हैं। इस स्थिति में लगभग पूरा ही दिन अस्पताल रोड सहित अन्य मार्गों पर टै्रफिक दबाव के हालात बनते हैं।  बेलगाम दौड़ते हैं रेक पाइंट के ट्रक  सिरोंज {कुरवाई {लटेरी  एप्रोच रोड बनाने में रही बाधा  फ्लाई ओवर : खाई रोड और पेढ़ी स्कूल से चढ़ने बन रहीं सीढ़ियां  सर्द हवाओं से कंपकंपातेे रहे लोग  अब कैमरे से होगी प्रमुख चौराहों की निगरानी  छह दुकानों के टूटे ताले  हाइवे पर खड़े हो रहे डंपर  रेलवे क्षेत्र की सड़क खराब
 
 
 
 
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