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स्पेशल टैलेंट स्पेशल टैलेंट खुशबू चौकसे। हाल ही में भोपाल के खजूरीकलां स्थित एसओएस बालग्राम में राज्यपाल मंंगुभाई पटेल ने वहां र खुशबू चौकसे। हाल ही में भोपाल के खजूरीकलां स्थित एसओएस बालग्राम में राज्यपाल मंंगुभाई पटेल ने वहां रह रहे स्पेशल बच्चों को सम्मानित किया। इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी से पीड़ित ये बच्चे नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर मेडल जीत चुके हैं। ये बच्चे इन दिनों बर्लिन में 2023 में आयोजित होने जा रहे स्पेशल बच्चों के वर्ल्ड समर गेम की तैयारियों में जुटे हुए हैं। खास बात यह है कि यहां इन बच्चों को एसओएस में मां मिली, एक फैमिली मिली। इन स्पेशल बच्चों से सिटी भास्कर ने की बातचीत। एसओएस बालग्राम में इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी से पीड़ित बच्चे कर रहे हैं बर्लिन समर गेम्स-2023 में खेलने एसओएस बालग्राम में इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी से पीड़ित बच्चे कर रहे हैं बर्लिन समर गेम्स-2023 में खेलने की तैयारी SOS के हर बच्चे की खास कहानी...किसी के मां-बाप हैं ही नहीं; किसी के हैं, लेकिन बच्चों को छोड़ दिया SOS के हर बच्चे की खास कहानी...किसी के मां-बाप हैं ही नहीं; किसी के हैं, लेकिन बच्चों को छोड़ दिया अच्छाई हमेशा बढ़ती जाती है अच्छाई हमेशा बढ़ती जाती है अ गर आप औरों से भिन्न होना चाहते हैं, तो रिटायर हो रहे कर्मचारियों को क्या तोहफा देंगे? कुछ क्षण सोच अ गर आप औरों से भिन्न होना चाहते हैं, तो रिटायर हो रहे कर्मचारियों को क्या तोहफा देंगे? कुछ क्षण सोचें फिर आगे पढ़ें कि रमेश गिडरोनिया और राधेश्याम ठाकरे को क्या तोहफा मिला होगा, जो भोपाल स्थित मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में 25 साल सेवाएं देने के बाद इस साल 30 जून और 31 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं। मुझे उनका पद नहीं पता, पर वे शायद चतुर्थ व तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैं।मैनिट के उसी विभाग के दो शिक्षकों- प्रोफेसर आलोक मित्तल व उनकी पत्नी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ज्योति मित्तल ने उन्हें कुछ अलग तोहफा देने का तय किया। उन्होंने दोनों की 19 जून 2022 की भोपाल से दिल्ली और वापसी की भी निजी एयरलाइंस से टिकट बुक की, इसमें एयरपोर्ट पर 5 घंटे बिताना भी शामिल था। सबको पता है कि निजी एयरलाइंस हर छोटी सुविधा के लिए एक्स्ट्रा चार्ज करते हैं, जो कुछ समय पहले तक मुफ्त थीं, जैसे सीट चुनने से लेकर भोजन तक। मित्तल दंपति को पता था कि गिडरोनिया व ठाकरे जीवन में कभी भी विमान में नहीं बैठे, इसलिए उन्होंने अतिरिक्त पैसा देकर टिकटें बुक कराई ताकि विंडो सीट के साथ दोनों तरफ की यात्रा में भोजन मिले साथ ही वे खिड़की से पीछे चलती दुनिया के नजारे देखकर उनका लुत्फ उठा सकें। इसके अलावा उन्हें ये समझाते हुए 1500 रु. भी दिए कि एयरपोर्ट लाउंज में खाने की हर चीज 200-300 रु. से ज्यादा की होती है इसलिए इन पैसों को खर्च करते हुए उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं। मित्तल ने पैसे देते हुए कहा कि ‘ये बचाने के लिए नहीं बल्कि चीजों का अनुभव करनेेे के लिए दिए हैं।’ मित्तल ने उन्हें कई दिनों तक नहीं बताया था कि उन्होंने उनके लिए टिकट बुक की थीं। उन्होंने ये भी सुनिश्चित किया कि यात्रा छुट्‌टी के दिन हो ताकि उन्हें अवकाश न लेना पड़े।फिर प्रोफेसर मित्तल ने दोनों को राउंड ट्रिप के लिए भोपाल एयरपोर्ट पर छोड़ा और वापसी में उन्हें लेने आने का भी वादा किया। एयरपोर्ट के अंदर पहुंचते ही दोनों को लगा जैसे वे मेले में कहीं खो गए हों। ऐसा असमंजस भरा व्यवहार दो तरह के लोग ही नोटिस कर पाते हैं- या तो चोर-उच्क्के जो पैसे लूटने की फिराक में होते हैं या फिर बड़े दिल वाले अच्छे लोग। सौभाग्य से उन्हें दूसरे नंबर की प्रवृत्ति वाले सज्जन मिल गए। दिल्ली में रहने वाले बिजनेसमैन अनीष गोयल ने असमंजस भरे इन चेहरों को पढ़ लिया। अनीष के पिता राजनीति से जुड़े हैं। अनीष ने उनसे धीरे-धीरे बातचीत शुरू की और फिर उन्हें मिले इसे अनोखे तोहफे के बारे में पता चला। उन्होंने मित्तल का नंबर लिया और इस पूरे अरेंजमेंट को समझने के लिए उनसे बात की। मित्तल ने उनसे अनुरोध किया कि क्या वे दिल्ली में उन्हें टी-1 टर्मिनल पर छोड़ देंगे, जहां से उन्हें भोपाल वापसी की फ्लाइट मिलेगी। गोयल ने न सिर्फ इसका वादा किया बल्कि कहा कि इस बीच पांच घंटों में वह उन्हें दिल्ली की रोड ट्रिप पर ले जाएंगे। अनीष ने अपने ऑफिस फोन करके दो कारें भेजने के लिए कहा, एक खुद वापस ऑफिस जाने के लिए और दूसरी से उन लोगों को रायसीना हिल्स, इंडिया गेट, पार्लियामेंट स्ट्रीट और राष्ट्रपति भवन का रास्ता घुमाते हुए वापस टी-1 पर छोड़ने के लिए कहा, जहां से उनकी वापसी की फ्लाइट थी। भोपाल एयरपोर्ट पर मित्तल ने उनका बड़े से बुके से स्वागत किया और दोनों आल्हादित हो उठे।फंडा यह है कि अच्छाई कितनी भी छोटी क्यों न हों, यह हमेशा बढ़ती जाती है और अगर यह एक अच्छे विचार के साथ थोड़ी भिन्न हो, फिर तो इसकी गूंज दूर तक जाती है, जैसा गिडरोनिया और ठाकरे के मामले में हुआ। न्यूज ब्रीफ न्यूज ब्रीफ मैं अपने काम से हिंदी भाषी लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लूंगी: रश्मिका मंदाना मैं अपने काम से हिंदी भाषी लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लूंगी: रश्मिका मंदाना मेरे हसबैंड फिल्म के डायरेक्टर, लेकिन घर की डायरेक्टर मैं हूं मेरे हसबैंड फिल्म के डायरेक्टर, लेकिन घर की डायरेक्टर मैं हूं बच्चों ने ड्रामा वर्कशॉप में सीखा वाॅइस मॉड्यूलेशन बच्चों ने ड्रामा वर्कशॉप में सीखा वाॅइस मॉड्यूलेशन एसओएस में सीखी साइकिल चलाना, इंटरनेशनल में जीता सिल्वर मेडल एसओएस में सीखी साइकिल चलाना, इंटरनेशनल में जीता सिल्वर मेडल आर्ट के जरिये करती हूं खुद को एक्सप्रेस, मेरा आर्टवर्क ही मेरी आवाज आर्ट के जरिये करती हूं खुद को एक्सप्रेस, मेरा आर्टवर्क ही मेरी आवाज स्पेशल ओलिंपिक में साइक्लिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली प्रदेश की पहली लड़की स्पेशल ओलिंपिक में साइक्लिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली प्रदेश की पहली लड़की बाल भास्कर को मिला बाल पत्रिका सम्मान बाल भास्कर को मिला बाल पत्रिका सम्मान मैनेजमेंट फंडा मैनेजमेंट फंडा ‘अनहद’ नृत्य नाटिका में दिखेगा डांस का कोलॉज ‘अनहद’ नृत्य नाटिका में दिखेगा डांस का कोलॉज चित्रों में चटक रंगों से दिखी जनजातीय संस्कृति चित्रों में चटक रंगों से दिखी जनजातीय संस्कृति शौर्य स्मारक में दिखाई ‘फॉर ए नोबल कॉज’ शौर्य स्मारक में दिखाई ‘फॉर ए नोबल कॉज’ भोपाल, बुधवार 29 जून 2022|5 भोपाल, बुधवार 29 जून 2022|5
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