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देश का पहला राज्य; हर जिले में होगा सरकारी मेडिकल कॉलेज, हर साल मिलेंगे 5 हजार डॉक्टर

कॉलेजों में मेडिकल सीटेंएसएमएस जयपुर 250जेएलएन अजमेर 250एसएन जोधपुर 250आरएनटी उदयपुर 250एसपी बीकानेर 250सरकारी कॉलेज कोटा 250आरयूएचएस जयपुर 150झालावाड़ 200डूंगरपुर 150पाली 150भरतपुर 150भीलवाड़ा 150चूरू 150बाड़मेर 150सीकर 150{यह संख्या सिर्फ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की है, प्राइवेट कॉलेजों में अलग सीटें हैं।

एसएमएस देश का ऐसा पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज, जहां होगी ट्रांसप्लांट सर्जरी की पढ़ाई
आने वाले तीन सालों में राजस्थान मेडिकल एजुकेशन का हब बन जाएगा। क्योंकि अब हर जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज वाला राजस्थान देश का पहला राज्य होगा। अभी प्रदेश में 33 में से 15 जिलोें में मेडिकल कॉलेज हैं। इसके अलावा 15 जिलों में भी मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव केंद्र पास कर चुका है। सिर्फ राजसमंद, जालौर और प्रतापगढ़ ही तीन ऐसे जिले हैं जहां अभी मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, लेकिन राज्य सरकार ने इनके लिए भी केंद्र को प्रस्ताव भेज रखा है। इसके पारित होते ही सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खुल जाएंगे। यही नहीं अभी 15 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 2830 एमबीबीएस सीटें हैं। शेष 18 जिलों में 100-100 सीटों के हिसाब से करीब 1800 सीटें बढ़ने पर लगभग 5 हजार सीटें हो जाएंगी। यानी अगले 3 साल बाद प्रदेश को हर साल 5 हजार नए डॉक्टर मिलने लगेंगे। इससे डॉक्टरों की कमी नहीं होगी। लाेगों को भी क्वालिटी वाला इलाज मिलेगा। योजना के तहत खुलने वाले एक मेडिकल कॉलेज पर करीब 325 करोड़ रु. खर्च होंगे। इसमें 60% केंद्र व 40% राज्य सरकार खर्च करेगी।
मिलेंगे पीएचसी, सीएचसी को डॉक्टर, कम होगी नवजात व मातृ मृत्यु दर
एसएमएस मेडिकल कौलेज
राजसमंद, जालौर और प्रतापगढ़ जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए केन्द्र को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव स्वीकृत होते ही राज्य के 33 िजलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा सकेंगे। जिस जिले में मेडिकल कॉलेज नहीं था, उसकी स्वीकृति भी मिल चुकी है। कार्यकारी एजेंसी भी नियुक्ति की जा चुकी है। -डॉ. रघु शर्मा, चिकित्सा मंत्री
अक्टूबर 2019 में बजट स्वीकृत, फरवरी 2020 में कार्यकारी एजेंसी नियुक्त, यह रही टाइमलाइन
अक्टूबर 2019 में अलवर, करौली, टोंक, बांरा, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर, नागौर, श्रीगंगानगर, सिरोही और बूंदी जिले में हरेक मेडिकल कॉलेज के लिए 325 करोड़ (प्रत्येक के लिए) रुपए स्वीकृत किए गए।
{केन्द्रीय प्रवर्तित योजना के तहत नवंबर 2019 में सवाईमाधोपुर, टोंक, हनुमानगढ़, झुन्झुनू और दौसा में हरेक कॉलेज के लिए 325 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए। इससे भी प्रक्रिया आगे बढ़ी। चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ये कदम उठाए गए।
{इस साल फरवरी में चित्तौड़गढ़, श्रीगंगानगर, सिरोही जिले में मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य और जिला अस्पताल के लिए कार्यकारी एजेंसी आरएसआरडीसीसी नियुक्त हुई।
{अलवर, करौली, टोंक, सवाईमाधोपुर, बारां, बूंदी, बांसवाड़ा, दौसा, हनुमानगढ़, नागौर, झुन्झुनू और जैसलमेर के लिए एचएससीसी कार्यकारी एजेन्सी नियुक्त हुई।
एसएमएस अस्पताल में इमरजेंसी और न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग भी बनेगा
एसएमएस मेडिकल कॉलेज में अब ट्रांसप्लांट मेडिसिन विभाग खोलने की तैयारी कर ली गई है। इससे कॉलेज हार्ट, लीवर, किडनी, पेन्क्रियाज ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर तैयार कर सकेगा। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी का कहना है कि कॉलेज प्रशासन की ओर से प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा गया है। इसमें मैनपाॅवर, इन्फ्रास्ट्रक्चर और उपकरण शामिल हैं। अनुमति मिलने के बाद एक और नया विभाग बन जाएगा। सरकारी स्तर पर यह देश का पहला मेडिकल कॉलेज होगा, जहां पर ट्रांसप्लांट मेडिसिन विभाग होगा। इसके अलावा नेशनल मेडिकल कमीशन ने इमरजेंसी मेडिसन विभाग खोलने के लिए कहा है। एसएमएस में इमरजेन्सी मेडिसिन और न्यूक्लिर मेडिसिन विभाग खोलना प्रस्तावित है।
हर जिले में मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद घर के पास ही इलाज व उच्च स्तरीय लैब (माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलोजी व एडवांस वायरोलॉजी) की सुविधा उपलब्ध हो पाएगी। नवजात और मातृ मृत्यु दर में कमी आएगी, जांंच सुविधा से बीमारी पहचानकर इलाज आसान व बेहतर होगा। मरीजों को ऑपरेशन के लिए लंबे समय तक इंतजार भी नहीं करना होगा। इसके अलावा ज्यादा डॉक्टर उपलब्ध होने पर इलाज के लिए हर पीएचसी-सीएचसी पर डॉक्टर तैनात होंगे।
सेहतमंद राजस्थान
जिलों में 100-100 के हिसाब से बढ़ जाएगी एमबीबीएस सीटों की संख्या
18
मेडिकल सीटें हैं अभी प्रदेश के 15 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में
2830
सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं अभी, 15 को मंजूरी मिल चुकी, 3 का प्रस्ताव केंद्र को भेजा
15
325
करोड़ रु. एक काॅलेज पर खर्च होगा, 60% हिस्सा केंद्र तो 40% राज्य देगा

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