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देश की सबसे बड़ी डॉ. हाइलीज मेडिकल लाइब्रेरी एसएमएस में; 21 सब्जेक्ट की 1.07 लाख किताबें

रेलवे स्टेशन को परकोटे से जोड़ा, आरयू के लिए बुलाए मैसूर के शिक्षाविद्मिर्जा ने परकोटे को रेलवे स्टेशन से जोड़ने और व्यापारियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की स्थापना जैसे कई काम किए। सेंट जेवियर्स स्कूल की स्थापना को उन्होंने अमेरिकन जेसुइट सोसाइटी को बुलाया। राजस्थान यूनिवर्सिटी के लिए उन्होंने मैसूर से शिक्षाविद बुलाए थे। दरअसल मिर्जा जानते थे कि बेहतरीन प्रशासन के नतीजे भविष्य में जरूर दिखाई देते हैं। उन्होंने लिखा है- धन को इकट्ठा करने की बजाय उसे उपयोगी ढंग से खर्च करना चाहिए। अगर मैंने नए दफ्तरों व बंगलों के निर्माण के साथ जयपुर में अन्य सुधार नहीं किए होते तो इसे शायद राजस्थान की राजधानी के तौर पर नहीं चुना जाता। 1945 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन इसके बाद भी वे जयपुर के विकास कार्यों से जुड़े रहे। जयपुर की प्रसिद्ध सड़क एमआई रोड भी मिर्जा इस्माइल के ही नाम पर है।

हर विषय का ज्ञान सागर
{500 रीडर कैपेसिटी है इस लाइब्रेरी की{200 मेडिकल स्टूडेंट रोजाना आते हैं यहां
राजस्थान के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज सवाई मानसिंह कॉलेज (एसएमएस) की डॉ. हाइलीज लाइब्रेरी भी देश की सबसे बड़ी मेडिकल लाइब्रेरी है। 1947 में देश की आजादी के साथ ही इसकी नींव रखी गई थी और तब से यह मेडिकल स्टूडेंट का बड़ा सहारा है। इससे बनाने का श्रेय जाता है 1942 से 1945 तक जयपुर रियासत के प्रधानमंत्री रहे सर मिर्जा मुहम्मद इस्माइल काे। दरअसल, 1945 में सीकर दौरे के दौरान मिर्जा वहां के राव राजा कल्याण सिंह के यहां गए थे। वहां के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. एससी मेहता से बातचीत में उन्हें पता चला कि अन्य राज्यों के डॉक्टर्स यहां आने के बाद अपने गृह राज्यों में अच्छे पद मिलते ही वापस चले जाते हैं। इस कारण यहां हमेशा डॉक्टर्स की कमी बनी रहती है। ऐसे में मिर्जा ने नए मेडिकल कॉलेज का सपना देखा। मिर्जा इस काम में ऐसे जुटे कि देश के तत्कालीन वायसराय व गवर्नर जनरल लॉर्ड वैवेल द्वारा 1946 में ही एसएमएस मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रख दी गई व उसके अगले वर्ष यहां काम शुरू हो गया।
कॉलेज के निर्माण के साथ ही लाइब्रेरी की भी नींव रखी गई। इस लाइब्रेरी में अभी 1.07 लाख से अधिक किताबें हैं, जबकि 44533 इंटरनेशनल और नेशनल जर्नल्स हैं। इसके अलावा 3200 थीसिस भी हैं। यहां 500 स्टूडेंट एक साथ बैठ सकते हैं। हालांकि अभी भी 200 मेडिकल स्टूडेंट रोजाना यहां आते हैं। कमरे भी पूरी तरह एयरकंडीशन्ड हैं। इसी लाइब्रेरी में एक सेमिनार रूम भी है।
44533इंटरनेशनल और नेशनल जर्नल्स, 3200 थीसिस
आजादी के साथ मिर्जा इस्माइल ने रखी थी एसएमएस मेडिकल कॉलेज और सबसे बड़ी मेडिकल लाइब्रेरी की नींव
डॉक्टर्स की कमी देखी तो एसएमएस मेडिकल कॉलेज की स्थापना की
साल 1942 में मिर्जा इस्माइल ने बेंगलुरू से डॉ. रॉबर्ट हाइलीज को जयपुर बुलाया था। डॉ. हाइलीज तब शाही परिवार के फिजिशियन के तौर पर नियुक्त हुए। साल 1946 में एसएमएस मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखे जाने के बाद साल 1949 में डॉ. हाइलीज एसएमएस मेडिकल काॅलेज में मेडिसिन विभाग के पहले प्रोफेसर बने। इसके डॉ. हाइलीज ने मिर्जा के सहयोग से एमएसएस मेडिकल काॅलेज में पहली मेडिकल लाइब्रेरी की स्थापना की। तब से यह मेडिकल कॉलेज का ही हिस्सा थी। इसके 29 साल बाद 14 सितंबर 1976 को इस लाइब्रेरी का नाम हाइलीज के नाम पर डॉ. रॉबर्ट हाइलीज लाइब्रेरी रखा गया। अभी लाइब्रेरी की नई बिल्डिंग का उद‌‌्घाटन 4 जुलाई 2001 को किया गया, जबकि 15 अगस्त 2001 को इसे पूरी तरह नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया। यहां 21 विषयों की किताबंे हैं जबकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के जर्नल्स भी हैं।
समय के साथ बढ़ता गया ज्ञान का भंडार, अब अलग से भवन
ओपथेलमोलॉजी 2076
ईएनटी 949
पैथोलॉजी 5705
पीडिएट्रिक्स 2392
फॉर्माेकोलॉजी 3194
साइकोलॉजी 3333
रेडियोलॉजी 2139
सर्जरी 9931
ट्यूबरक्लोसिस 244
वेटरनरी मेडिसिन 52
प्रिवेन्टिव सोशल मेडिसिन 4817
किताब संख्या
एनाटॉमी 7105
बॉयोकैमिस्ट्री 3080
डरमेटोलॉजी 991
डाइगनोसिस एंड ट्रीटमेंट 725
फॉरेंसिंग मेडिसिन 1103
इतिहास 865
मेडिसिन 12564
एमएसस 4416
न्यूरोलॉजी 3393
गाइनिकोलॉजी 2861

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