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एमबीबीएस फाइनल ईयर के छात्र ने डिप्रेशन मेंआकर यूजी हॉस्टल के कमरे में की आत्महत्या


डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस फाइनल ईयर के एक स्टूडेंट ने मानसिक तनाव में शनिवार को हॉस्टल के कमरे में खुदकुशी कर ली। शाम करीब साढ़े पांच बजे की इस घटना की शास्त्रीनगर पुलिस को करीब साढ़े आठ बजे बाद सूचना मिली तो पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव फंदे से उतारा। पिछले एक दशक में एसएन मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट के सुसाइड करने का यह पहला मामला है। उधर, स्टूडेंट्स ने कॉलेज प्रबंधन की अनदेखी के चलते उन्हें हो रही परेशानियों को ही मानसिक तनाव की वजह करार दिया है।
शास्त्रीनगर थानाधिकारी पंकजराज माथुर ने बताया कि मूलतया: जालोर के रामसीन निवासी गीनाराम देवासी (25) पुत्र केवाजी देवासी डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस (बैच-2016) अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। यहां यूजी हॉस्टल नं. 2 की तीसरी मंजिल पर एक कमरे में रहता था। इन दिनों चल रही परीक्षा उसने नहीं दी। उसके साथ रहने वाला रिश्ते में भाई शनिवार को प्रतियोगी परीक्षा तैयारी की क्लास अटेंड करने गया हुआ था। देर शाम बाद हॉस्टल के अन्य स्टूडेंट्स ने खाना खाने जाते समय गीनाराम को आवाज दी, लेकिन भीतर से कोई जवाब नहीं मिला और न ही मोबाइल पर बात हो पाई। काफी देर तक दरवाजा खटखटाया पर कोई जवाब नहीं आया। इस बीच अन्य स्टूडेंट्स भी वहां जमा हो गए। बाद में उन्होंने दरवाजा तोड़ा तो भीतर गीनाराम को पंखे से रस्सी के फंदे पर झूलता पाया। इससे पूरे हॉस्टल में दहशत फैल गई। कुछ ही देर बाद हॉस्टल वार्डन इत्यादि वहां पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। रात करीब साढ़े आठ बजे सूचना मिलने पर शास्त्रीनगर पुलिस मौके पर पहुंची और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव को नीचे उतारा। स्टूडेंट्स के अनुसार, उसके कमरे में कुछ लाइनें लिखा एक सुसाइड नोट रखा था, जिसमें उसने खुद के परेशान होने का जिक्र किया था। हालांकि, किसी ने उसे छुआ नहीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल कमरे को लॉक कर दिया गया है और इसकी तलाशी परिजनों की मौजूदगी में ली जाएगी।
मेडिकोज बोले- पानी भी नहीं मिले, वहां तनाव नहीं तो क्या होगा?
हॉस्टल पहुंचीं भास्कर टीम को स्टूडेंट्स ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एक साल से जितनी समस्याएं बढ़ी है, उतनी तीन-चार साल में भी नहीं देखी। गर्मी में पीने का पूरा पानी तक नहीं मिलता और मजबूरन बाहर से पानी के कैंपर मंगवाने पड़ रहे हैं। गरीब स्टूडेंट्स यह खर्च नहीं उठा पाते, वो सबसे ज्यादा परेशान हैं। रीडिंग रूम नहीं खुलता और पूरे परिसर में गंदगी सहित कई समस्याएं हैं। प्रशासन तक शिकायतें पहुंचाते हैं तो फेल करने की धमकी देकर चुप करा देते हैं। स्टूडेंट्स का आरोप है कि इन्हीं समस्याओं की वजह से ज्यादातर छात्र मानसिक अवसाद की स्थिति में आ चुके हैं।
गीनाराम देवासी
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज का संभवतया पहला केस, स्टूडेंट्स ने लगाए कॉलेज प्रबंधन पर संगीन आरोप
{शाम करीब 5:30 बजे की घटना, पुलिस को 8:30 बजे मिली सूचना{खाना खाने जाते स्टूडेंट्स ने आवाज दी पर जवाब नहीं मिला, दरवाजा तोड़कर देखा तो पंखे पर झूलता मिला, परिजनों के आने के बाद होगी कमरे की तलाशी
दोस्त से स्कूटी लेकर गया रस्सी खरीदने!
पुलिस के अनुसार गीनाराम 22 फरवरी को ही गांव से लौटा था। शुक्रवार शाम को उसने साथियों के साथ क्रिकेट खेली। शनिवार को अपने सहपाठी को पढ़ाई के लिए बुलाया था, लेकिन बाद में बाजार जाने का कह आने से मना कर दिया। शनिवार दोपहर 12:30 बजे अपने दोस्त दरजी के पास जाने के लिए स्कूटी मांगी और आधे घंटे बाद चाबी वापस दे गया। उस दोस्त के अकाउंट में ही गीनाराम के भाई ने दो हजार रुपए भेजे थे। गीनाराम ने इसमें से 1500 रुपए निकाले और जाते-जाते बोला कि अब आराम से पढ़ो, टेंशन मत लो। संभवतया जब वो बाजार गया, तो एटीएम से रुपए निकाल रस्सी खरीद लाया था।
घटना की जानकारी मिलने के करीब एक घंटे बाद मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. गुलझारी लाल मीणा व अन्य अधिकारी भी यहां पहुंच गए। मेडिकल कॉलेज के इस हॉस्टल में पिछले डेढ़ दशक में किसी स्टूडेंट के सुसाइड करने का ये पहला मामला है। ऐसे संगीन मामले को देखते हुए पुलिस ने घटना स्थल की फोटोग्राफी करवा शव नीचे उतार लिया। तीसरी मंजिल से इसे नीचे ले जाने और एमडीएम हॉस्पिटल तक ले जाने के कई बार स्ट्रेचर मंगवाने के लिए कहा, लेकिन तमाम अफसरों के यहां होने के बावजूद स्ट्रेचर लाने में करीब एक घंटा लग गया।
प्रिंसिपल सहित अफसर मौके पर, फिर भी करीब एक घंटा लगा स्ट्रेचर लाने में

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