X

My Bookmarks

X

Select Date

Date

OK
Your Choices Regarding Cookies

We and third parties may deploy cookies and similar technologies when you use our site. Please review the information below and select the cookies for enhancing your Site/ App experience. However, you can change your consent choices at anytime by clicking “withdraw consent” from Hamburger menu/ left menu drawer on the Site/ App.

Web analytics

We use cookies to analyze and measure traffic to the site so that we know our audience and can improve our site, determine what stories are read, preferred news edition, default setting for the preferred news edition/ bookmarked news, where visitors come from, and how long they stay. Opt-In to these analytics cookies by clicking enable.

Content recommendation and personalization

We use third-party services for enabling your successful registration/subscription to E-paper module, to provide newsletters, content recommendations and customize your user experience and advertising. Opt-In to these content recommendation cookies by clicking enable. Please read our Cookie Policy and Privacy Policy for more details

Continue
Please Confirm

Are you sure you want to continue?

वैक्सीन बनाने की क्षमता 150 करोड़ डोज सालाना से बढ़कर 350 करोड़ हुई

135 करोड़ डोज सालाना क्षमता अकेले हैदराबाद के फार्मा क्लस्टर जीनोम वैली की।


जिन 7 कंपनियों की वैक्सीन आनी है, उन्होंने भी अपनी क्षमता दोगुनी करने के लिए नए प्लांट लगाए
दुनिया में कोरोना वैक्सीन के मामले में भारत इस समय बिग ब्रदर की भूमिका में है। वैक्सीन निर्माण हो या उसकी कीमत या वैक्सीन का प्रभाव या दूसरे देशों की मदद, हर मामले में भारत आगे है। दुनिया को वैक्सीन देने के लिए भारत की टीका निर्माता कंपनियों ने अपनी उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी कर ली है। वर्तमान में देश में सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक कोरोना वैक्सीन बना रही हैं। सात अन्य कंपनियां ट्रायल की फाइनल स्टेज में हैं। इन सभी कंपनियों ने नए प्लांटों के निर्माण से अपनी उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी कर ली है। जनवरी 2021 तक देश में कोरोना वैक्सीन की सालाना उत्पादन क्षमता 150 करोड़ डोज थी। यह अब बढ़कर 350 करोड़ डोज सालाना हो गई है।
स्वदेशी सीरम इंस्टीट्यूट जनवरी तक 5 करोड़ डोज प्रतिमाह कोरोना वैक्सीन बना रही थी। अब यह क्षमता बढ़कर 10 करोड़ हो गई है। वहीं, भारत बायोटेक प्रति माह लगभग डेढ़ करोड़ डोज बना रही थी, जो बढ़कर लगभग 5.80 करोड़ हो गई है। देश में अनुमति मिलने के इंतजार में खड़ी कैडिला, जिनोवा, इंडियन इम्यूनॉजिकल, अरविंदो, डॉ. रेड्‌डी, हेटेरो और बॉयोलॉजिकल ई कंपनियों ने भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा ली है। सभी कंपनियों में कुल 7 हजार लोगों को नए रोजगार मिले हैं। हैदराबाद स्थित फार्मा क्लस्टर जीनोम वैली में ही केवल कोरोना वैक्सीन का प्रोडक्शन ही 135 करोड़ डोज सालाना होगा।
चीन ने 45 देशों को वैक्सीन दी, लेकिन उसका असर कम
ब्राजील को चीन ने अपनी वैक्सीन दी थी। वहां किए गए ट्रायल में यह मात्र 50 फीसदी ही प्रभावी दिखी।
हमारी वैक्सीन के दाम 90% तक कम, साइड इफेक्ट भी नहीं
यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न आॅस्ट्रेलिया के रिसर्चर डॉ श्रीनिवास गोली ने बताया कि कई दशकों से वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग में भारत लीडर है। कोरोना वैक्सीन बनने के बाद देश की क्षमता दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। सीरम, कैडिला, डॉ रेड्‌डी, भारत बायोटेक, बाॅयोलॉजिकल जैसी कंपनियों ने दूसरी वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग भी चलने दी और कोविड के लिए अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर भी खड़ा कर लिया। सबसे सस्ती वैक्सीन बनाने से भी विश्व में भारत की स्थिति मजबूत हुई है। अमेरिका में जो वैक्सीन बनी है उसकी कीमत 50 डाॅलर है। वहीं, भारत में बनी वैक्सीन की कीमत 3 डाॅलर से भी कम यानी 200 रुपए में सरकार ने खरीदी है। अगर बाजार बिक्री भाव और एक्सपोर्ट की बात भी की जाए तो भी भारत की वैक्सीन का रेट एक चौथाई से भी कम है। साइड इफेक्ट या प्रभाव की बात की जाए तो अभी लगभग डेढ़ करोड़ डोज से ज्यादा लग चुके हैं लेकिन एक भी साइड इफेक्ट का केस रिकॉर्ड नहीं हुआ है और असर भी बेहतर है।
चार लाख रोजगार मिलेंगे हैदराबाद के फार्मा क्लस्टर से
हैदराबाद में फरवरी में हुए बायोएशिया कंवेशन से पहले जीनोम वैली में विश्वस्तरीय तीन दर्जन कंपनियां आ गई हैं। और इतनी ही कंपनियों की क्षमता में इजाफा हुआ है। यह फार्मा क्लस्टर अगले एक दशक में 4 लाख रोजगार पैदा करेगा। अभी देश में 80 फीसदी मेडिकल उपकरण आयात होते हैं, कुछ समय बाद हम निर्यात करने की स्थिति में होंगे। तेलंगाना के प्रिंसिपल सेकेट्री इंडस्ट्री जयेश रंजन के अनुसार हैदराबाद में जीनोम वैली 2.0 पर काम हो रहा है। यहां 19 हजार एकड़ के सबसे बड़े फार्मा क्लस्टर की योजना पर काम हो रहा है। तेलंगाना में 800 फार्मा, बायोटेक, मेडटेक कंपनियां हैं।
भारत ने अब तक 60 से ज्यादा देशों को वैक्सीन दी
239.7 लाख डोज दूसरे देशों को भारत ने दिए हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक 60 देशों को टीके दिए गए।
भारत का 92 कम आय वाले देशों को 20 करोड़ डोज देने का वादा
एपी न्यूज की टैली में चीन का यह दावा भी गलत निकला कि वो 53 देशों को सहयोग में टीका दे रहा है।
चीन की चार बड़ी कंपनियों का दावा है कि वो इस साल के अंत तक 260 करोड़ वैक्सीन डोज बना लेंगी।
25 देशों में चीनी वैक्सीन का लगना शुरू हो चुका है। लेकिन बहुत सारे देशों ने टीका लेने से मना किया।
संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को भारत 2 लाख डोज देगा। अफ्रीका, लैटिन अमेरिका,अन्य देशों को भी टीके देंगे।
सहयोग में बांग्लादेश (20लाख), म्यांमार (17 लाख), नेपाल (10 लाख), भूटान (1.5 लाख) दिए गए।
74.7 लाख मुफ्त में और 165 लाख डोज कॉमर्शियल बेस पर हमने दूसरे देशों को दिया है।
बॉयोलॉजिकल-ई }यह कंपनी अमेरिका की एमआईटी की बनाई प्रोटीन एंटीजेन बेस्ड वैक्सीन है, जिसके देश में सात जगहों पर ट्रायल चल रहे हैं। ये पहले और दूसरे ट्रायल को एक साथ कर रही है जिसका रिजल्ट मार्च में आ जाएगा।
इंडियन इम्यूनोलाॅजिकल } वैक्सीन के लिए कंपनी का टाइअप आॅस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के साथ हुआ है। यह कंपनी भी अक्टूबर तक उत्पादन क्षमता 35 प्रतिशत तक बढ़ा लेगी। ये अगस्त के बाद आ सकती है।
कैडिला }गुजरात की कैडिला हेल्थकेयर ने डीएनए प्लेटफॉर्म पर आधारित वैक्सीन जाइकोव-डी बनाई है। इसका तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। इसने भी उत्पादन क्षमता दुगुनी करते हुए 25 करोड़ डोज सालाना कर ली है।
डॉ रेड्‌डीज }रूस के गमलेया रिसर्च सेंटर द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-वी फाइनल अप्रूवल के प्रॉसेस में है। हैदराबाद की डॉ. रेड्‌डीज लेबोरेटरीज इसे बना रही है। भारत में इसकी कीमत 730 रु. से भी कम होगी।
सीरम और बायोटेक के अलावा 7 और कंपनियों की वैक्सीन कतार में
5.5 करोड़ डोज क्षमता हुई भारत बायोटेक की, पहले डेढ़ करोड़ डोज प्रतिमाह बना रही थी।
10 करोड़ डोज उत्पादन क्षमता हुई सीरम इंस्टीट्यूट की, पहले 5 करोड़ प्रतिमाह बना रही थी।

X

X