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दुनिया को सीरम से उम्मीदें, 2022 में नाक से एक डोज में ली जाने वाली वैक्सीन का उत्पादन करेगी कंपनी

{आने वाले वर्षों में वैक्सीन निर्माण में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
लंबे समय तक चलेगा वायरस संकट : अदार पूनावाला
पूनावाला सोचते हैं, मौजूदा गति से विश्व की कोविड-19 वैक्सीन की मांग पूरी करने में दो साल लगेंगे। वे कहते हैं, यदि देशों की नियामक एजेंसियों के बीच अधिक तालमेल होता तो इससे कम समय लग सकता था। उनका कहना है, वायरस संकट लंबे समय तक चलेगा और भविष्य में वैक्सीन की मांग बनी रहेगी। पूनावाला का कहना है, दुनिया के कई हिस्सों में कोविड-19 का प्रकोप रहेगा।
मलेरिया वैक्सीन के लिए सीरम का ऑक्सफोर्ड व नोवावेक्स से गठजोड़ है। सप्लायरों से संबंधों के कारण ग्लास वायल और जैविक सामग्री बनाने के लिए खर्चीले बायोरिएक्टरों जैसी हर चीज उसे मिल गई।
सीरम ने ट्रायल से पहले ही किया था हजारों करोड़ का निवेश
कंपनी ने ट्रायल से पहले ही ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के लिए 582 करोड़ रुपए लगाए। पिछले वर्ष उसके कुल खर्च-335 करोड़ रुपए के हिसाब से यह रकम बड़ी है। फिर सीरम को बिल-मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन से 2185 करोड़ रुपए और बांग्लादेश, मोरक्को सहित कुछ सरकारों से एडवांस के बतौर 1675 करोड़ रुपए मिले। कंपनी ने भी 1966 करोड़ रुपए का और निवेश किया।
पूनावाला की योजनाएं महत्वाकांक्षी हैं। वे ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के मासिक उत्पादन को वर्तमान छह-सात करोड़ से बढ़ाकर अप्रैल तक दस करोड़ करना चाहते हैं। उस माह कंपनी अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स की वैक्सीन के चार-पांच करोड़ डोज बनाना शुरू कर देगी। इसके बाद सीरम इंस्टीट्यूट ब्रिटिश कंपनी स्पाईबायोटेक की वैक्सीन बनाएगी। वह 2022 में नाक से केवल एक डोज में ली जाने वाली अमेरिकी कंपनी कोडाजेनिक्स की वैक्सीन बनाएगी। पूनावाला का अनुमान है, वसंत के मौसम तक प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की नई क्षमता आने से पहले कंपनी विश्व की जरूरत की 40-50 प्रतिशत सप्लाई को पूरा कर चुकी होगी। 1960 के दशक में स्थापित सीरम इंस्टीट्यूट ने वर्षों तक ट्रायल की परंपरागत प्रक्रिया से अलग जोखिम उठाने का रास्ता चुना है। कंपनी रिसर्च, उत्पादन और वितरण की क्षमता में पैसा लगाती है। पिछले साल अप्रैल में अदार पूनावाला और उनके पिता साइरस के बीच संक्षिप्त चर्चा के बाद क्लीनिकल ट्रायल शुरू हुए बगैर ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के उत्पादन का निर्णय लिया गया था। पूनावाला मानते हैं,महामारी के कारण वैक्सीन का निर्माण और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
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सीरम इंस्टीट्यूट ने उत्पादन बढ़ाकर बिना किसी विवाद के हर जगह सप्लाई शुरू कर दी है। पूनावाला कहते हैं, इस वर्ष के अंत तक कंपनी कोरोना वायरस की डेढ़ अरब डोज बना लेगी। वह खसरा,टीबी से लेकर अन्य बीमारियों की एक अरब 30 करोड़ से लेकर डेढ़ अरब तक वैक्सीन सालाना बनाती है। पिछले साल तक छह हजार कर्मचारियों और पांच हजार 348 करोड़ रुपए सालाना आय की अपेक्षाकृत छोटी कंपनी कोरोना वायरस के खिलाफ वैश्विक संघर्ष के मिशन में महत्वपूर्ण बन गई है।
पूनावाला की योजनाएं महत्वाकांक्षी हैं। वे ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के मासिक उत्पादन को वर्तमान छह-सात करोड़ से बढ़ाकर अप्रैल तक दस करोड़ करना चाहते हैं। उस माह कंपनी अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स की वैक्सीन के चार-पांच करोड़ डोज बनाना शुरू कर देगी। इसके बाद सीरम इंस्टीट्यूट ब्रिटिश कंपनी स्पाईबायोटेक की वैक्सीन बनाएगी। वह 2022 में नाक से केवल एक डोज में ली जाने वाली अमेरिकी कंपनी कोडाजेनिक्स की वैक्सीन बनाएगी। पूनावाला का अनुमान है, वसंत के मौसम तक प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की नई क्षमता आने से पहले कंपनी विश्व की जरूरत की 40-50 प्रतिशत सप्लाई को पूरा कर चुकी होगी। 1960 के दशक में स्थापित सीरम इंस्टीट्यूट ने वर्षों तक ट्रायल की परंपरागत प्रक्रिया से अलग जोखिम उठाने का रास्ता चुना है। कंपनी रिसर्च, उत्पादन और वितरण की क्षमता में पैसा लगाती है। पिछले साल अप्रैल में अदार पूनावाला और उनके पिता साइरस के बीच संक्षिप्त चर्चा के बाद क्लीनिकल ट्रायल शुरू हुए बगैर ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के उत्पादन का निर्णय लिया गया था। पूनावाला मानते हैं,महामारी के कारण वैक्सीन का निर्माण और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
सालाना बनाती है। पिछले साल तक छह हजार कर्मचारियों और पांच हजार 348 करोड़ रुपए सालाना आय की अपेक्षाकृत छोटी कंपनी कोरोना
5 मार्च, 2020 को मुंबई में घुड़दौड़ के सीजन की समाप्ति पूनावाला ब्रीडर्स की कामयाबी के साथ हुई थी। रेसकोर्स की सफलता के बीच अदार पूनावाला और उनकी पत्नी नताशा की फिल्मी सितारों जैसी जीवनशैली पर खबरें सामने आई थीं। नताशा को एली मैग्जीन ने –इंडियाज फर्स्ट लेडी ऑफ फेबुलसनैस- कहा था। लेकिन, दवा कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट में पूनावाला दंपती के मुख्य काम की ओर बहुत कम ध्यान दिया गया था। एक साल बाद मालिकों की बजाय उनकी दवा कंपनी दुनियाभर में सुर्खियों में है। यूरोप में वैक्सीन उत्पादन में समस्याएं खड़ी हो गई हैं। अमेरिका में वितरण की परेशानियां हैं। हर कहीं वैक्सीन के लिए आपाधापी मची है। इस स्थिति में भारत की सीरम इंस्टीट्यूट से विश्व ने उम्मीदें बांध रखी हैं।
सीरम इंस्टीट्यूट ने उत्पादन बढ़ाकर बिना किसी विवाद के हर जगह सप्लाई शुरू कर दी है। पूनावाला कहते हैं, इस वर्ष के अंत तक कंपनी कोरोना वायरस की डेढ़ अरब डोज बना लेगी। वह खसरा,टीबी से लेकर अन्य बीमारियों की एक अरब 30 करोड़ से लेकर डेढ़ अरब तक वैक्सीन सालाना बनाती है। पिछले साल तक छह हजार कर्मचारियों और पांच हजार 348 करोड़ रुपए सालाना आय की अपेक्षाकृत छोटी कंपनी कोरोना वायरस के खिलाफ वैश्विक संघर्ष के मिशन में महत्वपूर्ण बन गई है।

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